सीजी भास्कर, 27 जनवरी। पहली नजर में यह एक सामान्य जलाशय का दौरा लगा, लेकिन जैसे-जैसे जानकारी सामने आई, साफ हुआ कि यहां सिर्फ पानी नहीं, बल्कि आजीविका और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव तैयार हो रही है। सरकारी योजना और स्थानीय प्रयासों के मेल ने एक अलग ही मॉडल खड़ा कर दिया है।
जशपुरनगर। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत एडिशनल सेंट्रल नोडल ऑफिसर श्री बी.के. पुरूशटी ने मनोरा विकासखंड स्थित सोगड़ा डेम का अवलोकन (Pradhan Mantri Dhan Dhanya Krishi Yojana) किया। इस दौरान उन्होंने डेम में आदिवासी कमल मछुआ सहकारी समिति द्वारा किए जा रहे मछली पालन कार्यों की विस्तृत जानकारी ली और मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अवलोकन के दौरान बताया गया कि आदिवासी कमल मछुआ सहकारी समिति वर्ष 2018 से लगातार सोगड़ा डेम में मछली पालन कर रही है। समिति के अध्यक्ष ने जानकारी दी कि डेम से प्रतिवर्ष लगभग 1500 किलोग्राम मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति को करीब दो लाख रुपये की वार्षिक आमदनी हो रही है। इस आय का लाभ समिति के सभी सदस्यों को साझा रूप से मिल रहा है।
समिति के सदस्यों ने यह भी बताया कि डेम के आसपास सब्जी उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित की जा रही है, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत (Pradhan Mantri Dhan Dhanya Krishi Yojana) हुए हैं। विभागीय सहयोग के तहत समिति को जाल, मछली बीज, आइस बॉक्स जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही बंद ऋतु के दौरान प्रत्येक सदस्य को तीन हजार रुपये की सहायता राशि भी दी जाती है।
निरीक्षण के दौरान ग्राम सोगड़ा निवासी ईश्वर राम का उदाहरण भी सामने आया, जिन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अपने निजी भूमि पर कुल 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में तालाब का निर्माण कराया है। इस परियोजना के लिए विभाग द्वारा 5.04 लाख रुपये की अनुदान राशि और 2.88 लाख रुपये की मत्स्य आहार सहायता प्रदान की गई।
तालाब में मछली पालन से ईश्वर राम को प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। इसके अलावा उन्होंने तालाब के साथ बत्तख और सूकर पालन को भी जोड़ा है, जिससे उनकी आय में और बढ़ोतरी (Pradhan Mantri Dhan Dhanya Krishi Yojana) हुई है। इस बहुआयामी कृषि मॉडल से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
अवलोकन के दौरान अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और मत्स्य योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर विकसित हो रहे हैं। सोगड़ा डेम जैसे उदाहरण यह साबित कर रहे हैं कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।


