सीजी भास्कर, 03 फरवरी | छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई में CSVTU PhD Fee Scam Bhilai का मामला सामने आने के बाद शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पीएचडी शोधार्थियों से निर्धारित शुल्क लेकर उन्हें फर्जी रसीदें थमाई गईं, जबकि रकम विश्वविद्यालय के खाते तक पहुंची ही नहीं।
शिकायत से खुला पूरा खेल
यह मामला तब सामने आया जब कई शोधार्थी एक साथ नई नियुक्त कुलपति के पास शिकायत लेकर पहुंचे। छात्रों का कहना था कि पीएचडी सब्मिशन के नाम पर उनसे 30-30 हजार रुपये लिए गए, लेकिन महीनों बाद भी फीस का कोई रिकॉर्ड विश्वविद्यालय प्रणाली में नहीं दिखा।
रसीद थी, रिकॉर्ड नहीं
जांच में सामने आया कि छात्रों को जो रसीदें दी गई थीं, वे आधिकारिक नहीं थीं। कागज़ पर सब कुछ सही दिखाया गया, लेकिन रकम न तो विश्वविद्यालय के खाते में जमा हुई और न ही किसी वैध रजिस्टर में दर्ज की गई। (Fake Fee Receipt Scam)
दो सदस्यीय समिति गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो सदस्यीय आंतरिक जांच समिति बनाई। प्रारंभिक जांच में 30 से अधिक शोधार्थियों से कुल 9 लाख 44 हजार 500 रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
FIR की ओर बढ़ा मामला
जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव ने 27 जनवरी को नेवई थाना को लिखित शिकायत भेजी। इसके बाद पीएचडी शाखा में पदस्थ कनिष्ठ सलाहकार सुनील कुमार प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
बढ़ सकती है गबन की राशि
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने स्पष्ट किया कि पीएचडी पाठ्यक्रम में 30 हजार रुपये की सब्मिशन फीस तय है। इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया गया। प्रारंभिक आंकड़ा करीब 10 लाख रुपये का है, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर राशि और बढ़ सकती है।
निजी खाते में पहुंचा पैसा
जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ मामलों में फीस नकद ली गई, जबकि कुछ शोधार्थियों से राशि सीधे आरोपी के निजी बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कराई गई। पूछताछ में आरोपी ने नकद वसूली की बात स्वीकार की है।
पूर्व प्रभारी कुलसचिव का नाम सामने
जांच के दौरान आरोपी ने दावा किया कि वसूली गई राशि वह तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव को सौंप देता था और बदले में रसीदें मिल जाती थीं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।
कार्य परिषद ने लिया सख्त रुख
22 जनवरी 2026 को हुई विश्वविद्यालय की कार्य परिषद बैठक में सर्वसम्मति से एफआईआर दर्ज कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद पुलिस ने विश्वविद्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए।
और नाम आ सकते हैं सामने
पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





