सीजी भास्कर, 15 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आस्था और विकास (Mahashivratri Chhattisgarh) का संदेश दिया। रायगढ़ प्रवास के दौरान देर रात करीब एक बजे मुख्यमंत्री साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ ग्राम कोसमनारा स्थित श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ और श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पूरे प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिव आराधना आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है, जो समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाती है।
1.20 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
पूजा-अर्चना के पश्चात मुख्यमंत्री साय ने जिला खनिज न्यास मद के अंतर्गत 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत (Mahashivratri Chhattisgarh) शिलान्यास किया। इन कार्यों में मुख्य भवन के सामने ग्रेनाइट फर्श और शेड का निर्माण, श्रद्धालुओं के विश्राम एवं भोजन हेतु शेड, शौचालय परिसर का निर्माण तथा पार्किंग क्षेत्र के लिए सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं के विकसित होने से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिलेगी और धाम की गरिमा और अधिक बढ़ेगी।
श्रद्धा का केंद्र, आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोसमनारा स्थित यह धाम न केवल रायगढ़ बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को सही दिशा देने के साथ आत्मविश्वास और संयम भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है।
1998 से तपस्या में लीन बाबा, वर्षों पुरानी परंपरा
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा वर्ष 1998 से कठोर तपस्या (Mahashivratri Chhattisgarh) में लीन हैं। वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके बाद धाम की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। कहा जाता है कि बाबा ने पत्थरों को एकत्र कर शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसी स्थान को अपनी तपोभूमि बनाया। वर्षा, ग्रीष्म और शीत—तीनों ऋतुओं में खुले स्थान पर रहकर भगवान भोलेनाथ की साधना उनकी तपस्या की विशेष पहचान है।
जनप्रतिनिधि और प्रशासन रहा मौजूद
इस अवसर पर जीवर्धन चौहान, डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच, गणमान्य नागरिकों के साथ मयंक चतुर्वेदी, शशिमोहन सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।





