सीजी भास्कर, 27 फरवरी। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ताजा सैन्य टकराव ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस संवेदनशील सीमा क्षेत्र की ओर खींच (Pakistan Afghanistan War History) लिया है। दोनों देशों के बीच हालिया हवाई हमलों और सीमा पर जवाबी कार्रवाई के बाद हालात जंग जैसे बन गए हैं, लेकिन यह संघर्ष अचानक नहीं भड़का।
इसकी जड़ें 132 साल पुराने डूरंड लाइन विवाद में छिपी हैं। वर्ष 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगान अमीर अब्दुल रहमान खान के बीच समझौते के तहत 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा खींची गई थी, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा तय करना था।
पाकिस्तान इस रेखा को अपनी वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान आज भी इसे औपनिवेशिक दौर में जबरन थोपी गई रेखा बताकर स्वीकार नहीं करता। अफगान पक्ष का कहना है कि इस सीमा ने पश्तून और बलूच कबीलों को दो हिस्सों में बांट दिया, जिससे सामाजिक और राजनीतिक असंतोष पैदा हुआ। यही असहमति समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव को जन्म देती रही है।
तनाव की दूसरी बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP को शरण (Pakistan Afghanistan War History) दे रही है, जो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ठिकानों पर हमले करता है। 2007 में बने इस संगठन ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है।
जब भी सीमा पार से हमले होते हैं, पाकिस्तान अफगान धरती से संचालित गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराता है और जवाबी सैन्य कार्रवाई करता है। इससे दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा हो जाता है। पहले फाटा (FATA) क्षेत्र एक तरह का बफर जोन था, जहां अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू थी, लेकिन 2018 में पाकिस्तान ने इसे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मिला दिया।
इसके बाद दोनों देशों की सीमाएं सीधे आमने-सामने आ गईं और छोटे-छोटे विवाद भी तेजी से सैन्य झड़प में बदलने लगे। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों में एयर स्ट्राइक और अफगानिस्तान की ओर से सीमा चौकियों पर जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
स्पष्ट है कि यह केवल सीमा का विवाद नहीं, बल्कि इतिहास, जातीय पहचान, आतंकवाद और क्षेत्रीय भू-राजनीति से जुड़ा जटिल मसला (Pakistan Afghanistan War History) है। जब तक डूरंड लाइन पर स्थायी समाधान, TTP पर प्रभावी नियंत्रण और आपसी विश्वास बहाली के प्रयास नहीं होंगे, तब तक दोनों देशों के बीच तनाव बार-बार भड़कता रहेगा।






