Israel Iran Conflict Update: इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ी कार्रवाई को ‘अस्तित्व की रक्षा’ से जुड़ा कदम बताया है। उनके अनुसार, ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम इजराइल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे थे। यही कारण था कि कोई कदम न उठाना भविष्य में और अधिक जोखिमपूर्ण साबित हो सकता था।
‘Operation Epic Fury’ और संयुक्त कार्रवाई का दावा
विदेश मंत्री के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ समन्वय में चलाए गए ‘(Operation Epic Fury)’ के तहत तेहरान में लक्षित हवाई हमले किए गए। उनका कहना है कि ईरान अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम को अत्यंत गहरे भूमिगत ठिकानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी में था, जिससे भविष्य में सैन्य कार्रवाई लगभग असंभव हो सकती थी। इस बयान के बाद (Middle East Tension) और बढ़ गया है।
बातचीत बनाम सैन्य विकल्प
गिदोन सार ने यह भी कहा कि अमेरिकी पक्ष इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि ईरान वार्ता के नाम पर समय ले रहा था और तय शर्तों का पालन नहीं कर रहा था। ऐसे में कूटनीतिक विकल्प सीमित होते जा रहे थे। इसे कठिन, लेकिन आवश्यक निर्णय बताया गया।
जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय असर
हमले के बाद क्षेत्र में अस्थिरता की खबरें सामने आई हैं। ईरान की ओर से जवाबी मिसाइल हमलों की सूचना मिली, जिससे खाड़ी क्षेत्र के कई हिस्सों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम को (Global Security Concern) के रूप में देख रहा है।
भविष्य की राजनीतिक दिशा पर सवाल
इजराइली विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरानी जनता को भविष्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से नेतृत्व चुनने का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने माना कि मौजूदा सत्ता ढांचे में ऐसा होना आसान नहीं होगा। फिलहाल, विश्व समुदाय की नजरें आगे की कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर टिकी हैं।





