सीजी भास्कर, 5 मार्च। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल गतिविधियों से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज (Bilaspur High Court Decision) कर दी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने NIA स्पेशल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय देना उचित है।
यह मामला कांकेर जिले के आमाबेड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां रमेश मंडावी पुत्र राजमन मंडावी के खिलाफ प्रतिबंधित नक्सली संगठन से संबंध रखने और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी पर देश की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी। जांच के लिए प्रारंभिक रूप से 90 दिनों की अवधि (Bilaspur High Court Decision) तय की गई थी, जिसकी समय सीमा 14 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गई थी। इससे पहले 7 अक्टूबर 2025 को सरकारी पक्ष ने स्पेशल कोर्ट में आवेदन देकर जांच पूरी करने के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था।
सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि इस मामले में कुछ सह-आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है और राज्य शासन से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त नहीं हो सकी है। इन परिस्थितियों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पेशल कोर्ट ने जांच एजेंसी को 90 दिन का अतिरिक्त समय देने की अनुमति दे दी थी।
इसी दौरान आरोपी ने एनआईए स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपी ने स्पेशल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और जमानत की मांग की।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच (Bilaspur High Court Decision) में हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि स्पेशल कोर्ट का फैसला सही है और जांच के लिए अतिरिक्त समय देना उचित था। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी रमेश मंडावी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।





