सीजी भास्कर 11 मार्च देशभर में ईद को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। रमजान के पवित्र महीने के अंतिम दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि ईद आखिर किस दिन मनाई जाएगी। दरअसल, Eid ul Fitr 2026 Date पूरी तरह चांद के दिखाई देने पर निर्भर करती है। अगर 19 मार्च की शाम को शव्वाल का चांद नजर आता है तो भारत में ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि चांद दिखाई न देने की स्थिति में रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद 21 मार्च को यह पर्व मनाया जा सकता है।
चांद कमेटी की घोषणा के बाद ही तय होती है अंतिम तारीख
भारत में ईद की आधिकारिक तारीख स्थानीय चांद कमेटियों और धार्मिक संस्थाओं की घोषणा के बाद ही तय मानी जाती है। देश के कई शहरों में मस्जिदों और संगठनों की ओर से चांद देखने की परंपरा निभाई जाती है। जैसे ही चांद दिखाई देने की पुष्टि होती है, उसी के साथ अगले दिन ईद का ऐलान कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को Moon Sighting Eid कहा जाता है, जो इस्लामी परंपरा का अहम हिस्सा है।
रमजान और ईद का गहरा धार्मिक संबंध
इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान, इबादत और संयम का महीना माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा समय नमाज, कुरान की तिलावत और दुआ में बिताते हैं। रमजान खत्म होने के बाद शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी का पहला दिन ईद के रूप में मनाया जाता है। इसलिए ईद को रोजों की समाप्ति के बाद मिलने वाली खुशी और आध्यात्मिक संतोष का प्रतीक माना जाता है।
ईद-उल-फितर का इतिहास और परंपरा
इस्लामी इतिहास के अनुसार ईद-उल-फितर की परंपरा की शुरुआत पैगंबर Muhammad के समय से मानी जाती है। कहा जाता है कि 624 ईस्वी में Battle of Badr के बाद पहली बार मुसलमानों ने ईद-उल-फितर मनाई थी। समय के साथ यह पर्व दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल हो गया। इस दिन लोग विशेष नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं, जरूरतमंदों को जकात और फितरा देते हैं और परिवार के साथ खुशियां बांटते हैं।





