सीजी भास्कर, 16 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाते (Compassionate Appointment) हुए बैंक के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित ने समय पर आवेदन किया है, तो प्रशासन केवल “पद खाली नहीं है” का बहाना बनाकर उसे नौकरी देने से इंकार नहीं कर सकता।
यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के मामले में सुनाया है। अदालत ने बैंक के पुराने आदेश को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नियुक्ति देने का आदेश जारी किया है।
क्या था पूरा मामला? : Compassionate Appointment
याचिकाकर्ता संतोष सिन्हा के पिता छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर पदस्थ थे, जिनकी सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। पिता के निधन के बाद परिवार अचानक गहरे आर्थिक संकट में डूब गया। इस स्थिति से उबरने के लिए याचिकाकर्ता ने मृत्यु के महज दो महीने के भीतर ही बैंक के समक्ष अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया था।
अदालत में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अनादि शर्मा ने दलील दी कि समय पर आवेदन किए जाने के बावजूद बैंक ने इस मामले को वर्षों तक लटकाए रखा। इसके बाद बैंक ने एक हैरान करने वाला तर्क देते हुए आवेदन यह कह कर निरस्त कर दिया कि “संबंधित पद उपलब्ध नहीं है।” जबकि, इसी दौरान समान परिस्थिति वाले अन्य आवेदकों के मामलों पर विचार कर उन्हें नियुक्तियां दे दी गईं।
कोर्ट रूम में अधिवक्ता की प्रभावी दलीलें
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनादि शर्मा ने कोर्ट के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे-
नीति का उल्लंघन : बैंक अपनी ही अनुकंपा नियुक्ति नीति के विपरीत काम कर रहा है, जिसमें आश्रित परिवारों को प्राथमिकता और सहानुभूति देने का स्पष्ट प्रावधान है।
तकनीकी बहानों की आड़ : प्रशासनिक देरी और तकनीकी आधारों का सहारा लेकर किसी पीड़ित परिवार को उसके कानूनी हक से वंचित नहीं किया जा सकता।
तथ्यों की अनदेखी : कर्मचारी की मृत्यु के तुरंत बाद ही वह पद रिक्त माना जाना चाहिए था, इसलिए बैंक का यह तर्क तथ्यों और संवेदनशीलता दोनों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई, उसी क्षण संबंधित पद रिक्त हो गया था। याचिकाकर्ता ने समयसीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया था, इसलिए बाद में रिक्ति उपलब्ध नहीं होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस एके प्रसाद की पीठ ने आगे कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल वित्तीय राहत और संबल प्रदान (Compassionate Appointment) करना है। ऐसे संवेदनशील मामलों में संस्थानों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है।
अदालत का निर्देश :
हाईकोर्ट ने बैंक द्वारा 30 सितंबर 2022 को जारी किए गए रिजेक्शन ऑर्डर (निरस्तीकरण आदेश) को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही बैंक प्रबंधन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर उपलब्ध किसी भी चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में एक ‘नजीर’ (मिसाल) साबित (Compassionate Appointment) होगा। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभाग और बैंक तकनीकी कमियों या प्रशासनिक लेती-देती का हवाला देकर अनुकंपा के मामलों को टालते रहते हैं। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब आश्रित परिवारों को न्याय मिलने का रास्ता और साफ होगा।




