SC ST Act Cases Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत पिछले तीन वर्षों में कुल 2455 मामले दर्ज किए गए हैं। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक इन मामलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। कुल दर्ज मामलों में 1013 मामले दुष्कर्म से जुड़े हैं, जो लगभग 41 प्रतिशत के बराबर बताए गए हैं। इसके अलावा 73 हत्या के मामलों की भी जानकारी दी गई है।
मारपीट और गंभीर चोट के भी कई मामले दर्ज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में मारपीट कर चोट पहुंचाने के 380 मामले सामने आए हैं, जबकि गंभीर चोट से जुड़े 60 मामलों की जानकारी भी दी गई है। इसके अलावा अपहरण के 30 मामले भी दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़े प्रदेश के विभिन्न जिलों से एकत्रित पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किए गए हैं।
विधानसभा में सवाल के जवाब में मिली जानकारी
यह जानकारी विधानसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के जवाब में सामने आई। विधायक Punnulal Mohle ने सरकार से पूछा था कि पिछले तीन वर्षों में एससी-एसटी एक्ट के तहत कितने मामले दर्ज हुए और उनमें किस प्रकार के अपराध शामिल हैं। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री Vijay Sharma ने सदन में विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए।
जिलेवार आंकड़ों में जांजगीर-चांपा सबसे आगे
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार Janjgir-Champa जिले में सबसे अधिक 168 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद Balrampur-Ramanujganj जिले में 165 मामलों की जानकारी दी गई है। राज्य के 33 जिलों में से आठ जिलों में 100 से अधिक मामले दर्ज होने की बात भी सदन में बताई गई।
ज्यादातर मामलों में पुलिस ने दाखिल किया चालान
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कुल 2455 मामलों में से 2269 मामलों की जांच पूरी कर पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया है। वहीं 166 मामलों की जांच अभी भी जारी है। इसके अलावा 20 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।
पीड़ितों को दी गई आर्थिक सहायता
सरकार ने यह भी बताया कि कानून के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। अपराध की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग सहायता राशि तय की जाती है। 16 फरवरी 2026 तक कुल 1647 मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
28 करोड़ से अधिक की मदद, कई मामले लंबित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक पीड़ितों को 28 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी जा चुकी है। हालांकि 670 मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया अभी लंबित है। इन मामलों के प्रस्ताव आदिम जाति विकास समिति को भेजे गए हैं और मंजूरी मिलने के बाद पीड़ितों को सहायता राशि जारी की जाएगी।





