IPO Rules Relaxation India : भारत सरकार ने शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ लाने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। नए नियमों के बाद यह माना जा रहा है कि देश की कुछ बड़ी कंपनियां जल्द ही बाजार में अपने शेयर उतार सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारतीय पूंजी बाजार को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को मिली राहत
नई व्यवस्था के तहत जिन कंपनियों का बाजार मूल्य 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें लिस्टिंग के समय अपनी पेड-अप कैपिटल का केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा ही सार्वजनिक रूप से बेचने की अनुमति होगी। पहले इस श्रेणी की कंपनियों को अधिक हिस्सेदारी बाजार में लानी पड़ती थी। इस बदलाव से बड़ी कंपनियों को पूंजी बाजार में आने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए तय की गई समयसीमा
नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय सार्वजनिक हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से कम है, तो उसे इस स्तर तक पहुंचने के लिए पांच वर्ष का समय मिलेगा। इसके बाद 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए कुल दस वर्षों की समयसीमा तय की गई है। सरकार का कहना है कि इससे कंपनियों को बाजार में स्थिर तरीके से विस्तार करने का मौका मिलेगा।
वैल्यूएशन के आधार पर तय हुआ न्यूनतम पब्लिक फ्लोट
सरकार ने अलग-अलग बाजार पूंजीकरण के अनुसार न्यूनतम पब्लिक फ्लोट की सीमा भी तय की है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये के बीच है, उनके लिए न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी 2.75 प्रतिशत रखी गई है। वहीं 50 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियों के लिए यह सीमा 8 प्रतिशत तय की गई है। इस व्यवस्था से निवेशकों को बड़े कॉरपोरेट्स में निवेश के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
सुपीरियर वोटिंग राइट्स वाले शेयरों पर भी नया प्रावधान
नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कंपनी के पास सुपरियर वोटिंग राइट्स वाले शेयर हैं और वह अपने सामान्य शेयरों को सूचीबद्ध करना चाहती है, तो उसे इन विशेष अधिकार वाले शेयरों को भी सूचीबद्ध करना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।





