सीजी भास्कर, 14 मार्च। हरियाणा महिला आयोग के सामने तय तारीख पर पेश नहीं होने के बाद रैपर बादशाह की मुश्किलें (Badshah Controversy) बढ़ गई हैं। विवादित रैप गीत को लेकर पहले से चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। आयोग ने उनकी गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मामले की संवेदनशीलता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि शिकायत गीत के शब्दों और वीडियो में छात्राओं के चित्रण से जुड़ी बताई जा रही है। महिलाओं और बेटियों की गरिमा से जुड़े मुद्दे पर आयोग ने साफ संकेत दिया है कि लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
आयोग ने जताई नाराजगी, अगली कार्रवाई के संकेत
आयोग के समक्ष बादशाह खुद उपस्थित नहीं हुए, जबकि उनकी ओर से वकीलों का पक्ष रखा गया। उनकी तरफ से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि पेशेवर व्यस्तताओं के कारण वह तय समय पर नहीं पहुंच सके। साथ ही अगली तारीख देने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखने की अनुमति भी मांगी गई। हालांकि आयोग ने इसे पर्याप्त नहीं माना और तय समय तक व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर कड़ा रुख दिखाया। इसी के बाद कार्रवाई तेज होने की बात सामने आई।
गीत के बोल और वीडियो कंटेंट पर उठा विवाद
पूरा मामला ‘टटीरी’ गीत के रैप वर्जन को लेकर खड़ा हुआ है। आरोप है कि गीत के कुछ शब्द और वीडियो प्रस्तुति आपत्तिजनक हैं तथा छात्राओं के चित्रण को लेकर गंभीर (Badshah Controversy) सवाल उठे हैं। यही वजह रही कि महिला आयोग ने शुरुआती नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इस विवाद ने अब मनोरंजन जगत से निकलकर संस्थागत जांच और जवाबदेही का रूप ले लिया है। गाने को लेकर उठी आपत्तियां सिर्फ अभिव्यक्ति की सीमा तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक प्रभाव तक जा पहुंची हैं।
बादशाह की ओर से मंशा पर दी गई सफाई
रैपर की ओर से यह पक्ष रखा गया कि किसी की भावनाएं आहत करना उनका इरादा नहीं था। बताया गया कि इस विवाद पर वह पहले भी एक वीडियो के जरिए अपनी बात रख चुके हैं। उनके वकीलों ने आयोग के सामने यही दलील दी कि कलाकार की मंशा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। लेकिन फिलहाल आयोग का जोर इस बात पर दिख रहा है कि नोटिस मिलने के बाद व्यक्तिगत उपस्थिति क्यों नहीं हुई और मामले को जरूरी गंभीरता के साथ क्यों नहीं लिया गया।
अब नजर रहेगी अगली कानूनी और प्रशासनिक हलचल पर
यह मामला अब सिर्फ एक विवादित गीत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देखना अहम होगा कि आगे आयोग की ओर से क्या औपचारिक (Badshah Controversy) कदम उठाए जाते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि बादशाह को दोबारा पेश होने का अवसर दिया जाएगा या मामला और सख्त प्रशासनिक स्तर तक जाएगा। फिलहाल इतना साफ है कि यह विवाद अब सार्वजनिक बहस, सांस्कृतिक जिम्मेदारी और संस्थागत कार्रवाई – तीनों के केंद्र में आ चुका है।





