सीजी भास्कर, 10 मई । मदर्स डे पर जहां पूरी दुनिया मां के प्यार और त्याग को याद कर रही है, वहीं छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसे मासूम भी हैं, जिन्होंने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया। (Mother lost with the joy of birth)
किसी ने मां की गोद महसूस करने से पहले उसे खो दिया, तो कोई अब तस्वीरों में मां को पहचानना सीख रहा है। इन बच्चों की परवरिश अब परिवार के सहारे हो रही है, लेकिन मां की कमी हर पल महसूस होती है।
जन्म के कुछ घंटों बाद ही टूट गई खुशियां : Mother lost with the joy of birth
बीरगांव की 11 महीने की तनिश्का ने जन्म के महज कुछ घंटों बाद अपनी मां को खो दिया। प्रसव के बाद उसकी मां की तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। अब तनिश्का की देखभाल उसकी दादी कर रही हैं। परिवार का कहना है कि बच्ची ने कभी मां की गोद या उसका स्नेह महसूस नहीं किया।
इसी तरह कोरबा में एक महिला ने बेटे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया। परिवार के मुताबिक, घर में बच्चे के जन्म की खुशी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद मातम छा गया। नवजात बेटा अब बिना मां की ममता के बड़ा हो रहा है, जबकि बड़ा बेटा तस्वीरों में मां को पहचानता है।
जुड़वा बेटियों ने जन्म लेते ही खो दी मां
कोरबा जिले के एक गांव में महिला ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। परिवार के अनुसार, प्रसव के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
अब दोनों बच्चियों की परवरिश परिवार के सदस्य कर रहे हैं। परिजन बताते हैं कि बच्चियों के जीवन में मां की कमी हमेशा महसूस होगी। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं। (Mother lost with the joy of birth)
परिवार बन रहा बच्चों का सहारा
ऐसे मामलों में दादा-दादी, पिता और अन्य परिजन ही बच्चों की दुनिया बन गए हैं। परिवार के सदस्य बच्चों को मां की कमी महसूस न हो, इसके लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कई बच्चों को अभी यह भी नहीं पता कि मां क्या होती है, लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होंगे, मां की अनुपस्थिति उन्हें महसूस होगी।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे बच्चों को परिवार का भावनात्मक सहयोग बेहद जरूरी होता है। प्यार और अपनापन ही उन्हें सामान्य जीवन जीने में मदद कर सकता है।


