सीजी भास्कर, 20 मार्च। छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास के नाम पर हुई बर्बरता ने अब कानूनी मोर्चे पर बड़ा रूप (Mob Lynching Case CG) ले लिया है। एक ही परिवार के तीन लोगों के साथ हुई अमानवीय घटना पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं और राज्य के पुलिस प्रमुख से जवाब तलब किया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की रिपोर्ट शपथपत्र के साथ पेश की जाए। इस केस की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
घटना रायपुर जिले के अभनपुर थाना क्षेत्र की है, जहां 13 मार्च 2025 को ग्रामीणों ने तिलक साहू पर जादू-टोना करने का आरोप लगाकर हमला कर दिया।
जब उन्हें बचाने के लिए उनके पिता अमर सिंह साहू और भाई नरेश साहू पहुंचे, तो भीड़ ने तीनों को ही घेर लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया – तीनों को बुरी तरह पीटा गया, अर्धनग्न कर गांव में घुमाया गया, चेहरे पर कालिख पोती गई और जूतों की माला (Mob Lynching Case CG) पहनाई गई। इतना ही नहीं, उन्हें पूरी रात चौराहे पर बंधक बनाकर रखा गया।
पुलिस पर गंभीर आरोप
घटना की सूचना डायल-112 के जरिए पुलिस तक पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ितों की मदद करने के बजाय उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर करा लिए, जिसमें शिकायत न करने की बात लिखी थी। बाद में उन्हें गांव के बाहर छोड़ दिया गया। जब थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई, तो पीड़ितों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के आदेश भी नहीं माने?
कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में केस दर्ज करने और चालान पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पुलिस ने 21 आरोपियों पर केवल जमानती धाराएं लगाईं, जिसे लेकर पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए इसे भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) से जुड़ा मामला माना और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा।
पुलिस अफसरों पर कार्रवाई शुरू
मामले में लापरवाही को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी और एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच (Mob Lynching Case CG) शुरू कर दी गई है। दोनों अधिकारियों को चार्जशीट भी जारी की गई है। पिछली सुनवाई में DGP ने भी स्वीकार किया था कि जांच में पुलिस स्तर पर चूक की आशंका है।
अदालत ने क्यों रखा मामला लंबित?
हाईकोर्ट ने याचिका का आंशिक निपटारा करते हुए पुलिस अधिकारियों की भूमिका से जुड़े पहलू को लंबित रखा है। अदालत ने साफ कहा है कि इस तरह की घटनाओं में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब DGP को निर्देश दिया गया है कि विभागीय जांच की पूरी रिपोर्ट नए शपथपत्र के साथ पेश करें।


