सीजी भास्कर, 11 अगस्त : जरूरतमंद को सहायता देना (Divyang News) केवल उसके हाथ में सुविधा का साधन सौंप देना नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि वह सुविधा उसके जीवन के लिए सुरक्षित और उपयोगी साबित हो। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने एक दिव्यांग युवक के मामले में इसी सोच का परिचय दिया।
युवक ई-स्कूटी की मांग लेकर विधायक कार्यालय पहुंचा था, लेकिन जांच में उसके शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विधायक ने उसे तत्काल स्कूटी देने के बजाय पहले नशा छोड़ने की समझाइश दी और भरोसा दिलाया कि नशे से दूर होने के बाद उसे नियमानुसार ई-स्कूटी दिलाने में मदद की जाएगी।
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स्कूटी की मांग लेकर विधायक कार्यालय पहुंचा था दिव्यांग
सुपेला निवासी एक दिव्यांग (Divyang News) युवक अपनी जरूरत के लिए ई-स्कूटी की मांग लेकर शांति नगर स्थित विधायक कार्यालय पहुंचा था। युवक सड़क से ही तेज आवाज में विधायक को पुकार रहा था। आवाज सुनकर विधायक रिकेश सेन स्वयं कार्यालय के गेट तक पहुंचे और युवक को सम्मानपूर्वक अंदर बुलाया। बातचीत के दौरान युवक की आवाज लड़खड़ाती नजर आई और उसके व्यवहार से विधायक को उसके नशे में होने का संदेह हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए वैशाली नगर पुलिस और यातायात विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया।
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ब्रेथ एनालाइजर से जांच में शराब की पुष्टि
पुलिस और यातायात विभाग की टीम ने युवक की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की। जांच में युवक के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विधायक ने उसकी स्थिति को समझते हुए उसे डांटने या अपमानित करने के बजाय समझाइश देने का रास्ता अपनाया। विधायक ने युवक को बताया कि दिव्यांगजनों को ई-स्कूटी उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आसानी से आवागमन कर सकें।
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‘पहले नशा छोड़िए, फिर स्कूटी भी मिलेगी’
विधायक रिकेश सेन ने युवक से शराब छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि ई-स्कूटी उसके लिए सुविधा और स्वावलंबन का माध्यम बन सकती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे में वाहन चलाता है तो यह उसके लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए भी खतरा बन सकता है। उन्होंने युवक को भरोसा दिलाया कि नशे से दूर होने के बाद उसे ई-स्कूटी सहित शासन और विधायक की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
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दुत्कारा नहीं, सम्मान से समझाया
इस पूरे मामले में विधायक की पहल का मानवीय पक्ष भी सामने आया। उन्होंने दिव्यांग (Divyang News) युवक की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि यह समझने की कोशिश की कि जिस सुविधा की वह मांग कर रहा है, वह उसके लिए वास्तव में सुरक्षित भी है या नहीं। विधायक ने युवक को अपमानित करने के बजाय उसकी स्थिति समझी और नशे से होने वाले नुकसान के बारे में समझाया। उनका कहना था कि किसी जरूरतमंद को सहायता देने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वह सहायता उसके जीवन को सुरक्षित और बेहतर बनाए।
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सहायता का उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना
ई-स्कूटी उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आवागमन में सुविधा देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसके जरिए वे रोजगार, व्यवसाय और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए आसानी से आ-जा सकें। ऐसे में नशे की हालत में वाहन चलाना इस उद्देश्य के विपरीत साबित हो सकता है। विधायक ने तत्काल सुविधा देने के बजाय पहले नशे की आदत छोड़ने पर जोर देकर युवक को संभावित दुर्घटना से बचाने की कोशिश की।
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मदद का मतलब सुविधा के साथ सही दिशा देना भी
इस घटना ने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद व्यक्ति को सुविधा देने के साथ उसे सही दिशा देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एक ओर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-स्कूटी जैसी सुविधा उपलब्ध कराने की पहल है, तो दूसरी ओर नशे की हालत में वाहन चलाने से होने वाले संभावित हादसे को रोकने की कोशिश भी। युवक को तत्काल ई-स्कूटी देने के बजाय पहले नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना भले ही तत्काल कठोर निर्णय लगे, लेकिन इसके पीछे उसके जीवन और सड़क पर दूसरे लोगों की सुरक्षा की चिंता भी दिखाई देती है।
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