सीजी भास्कर, 21 मार्च। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब हिंद महासागर तक पहुंच (US Base Indian Ocean) गया है। ईरान ने शुक्रवार सुबह अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की। हालांकि राहत की बात यह रही कि दागी गई दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य से चूक गईं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
3800 किलोमीटर दूर से हमला, फिर भी टारगेट मिस
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने कुल दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला ऐसे बेस पर किया गया जो ईरान के तट से करीब 3800 किलोमीटर दूर स्थित है, जबकि तेहरान से इसकी दूरी 5000 किलोमीटर से भी ज्यादा बताई जाती है। इतनी लंबी दूरी तक मिसाइल पहुंचना ही इस बात का संकेत है कि संघर्ष अब क्षेत्रीय दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर की चिंता बनता जा रहा है।
डिएगो गार्सिया क्यों है अहम?
हिंद महासागर में स्थित यह सैन्य ठिकाना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण (US Base Indian Ocean) माना जाता है। यहीं से अमेरिकी सेना लंबी दूरी के बॉम्बर विमान संचालित करती है। इसके अलावा ईंधन भरने वाले टैंकर विमान और निगरानी करने वाले अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी यहां तैनात रहते हैं। इस बेस पर किसी भी तरह का सफल हमला क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन को प्रभावित कर सकता था।
ट्रंप का NATO पर हमला, सहयोगियों को कहा ‘कायर’
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने NATO देशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग न देने वाले NATO देश “कायर” हैं और अमेरिका के बिना यह गठबंधन कमजोर साबित हो रहा है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखना कोई कठिन सैन्य कदम नहीं है, लेकिन सहयोगी देश इसमें भी पीछे हट रहे हैं।
तनाव लगातार बढ़ रहा, खतरा बरकरार
हालांकि इस हमले में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना साफ संकेत (US Base Indian Ocean) देती है कि संघर्ष अब और खतरनाक दिशा में बढ़ सकता है। लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश से आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।


