Indravati Tiger Reserve Crisis 2026 : Indravati Tiger Reserve में बाघों की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। पिछले चार वर्षों में यहां 4 बाघों का शिकार हो चुका है, जिससे यह इलाका सुरक्षित अभयारण्य के बजाय खतरे का केंद्र बनता दिख रहा है।
बच सकते थे बाघ, बन सकता था बड़ा रिजर्व
जानकारों के अनुसार, यदि इन बाघों को बचाया जाता, तो इंद्रावती प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन सकता था। लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने इस संभावना को कमजोर कर दिया है।
जंगल में अब भी मंडरा रहा खतरा
वर्तमान में इंद्रावती के जंगलों में 6 से अधिक बाघ मौजूद हैं, लेकिन शिकारियों की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रहीं। कहीं फंदे बिछाए जा रहे हैं, तो कहीं पानी के स्रोतों में जहर मिलाकर बाघों को निशाना बनाया जा रहा है।
फंदे और नेटवर्क का बड़ा खुलासा
हाल ही में Dantewada क्षेत्र में पकड़े गए एक गिरोह से 40 मीटर लंबा फंदा बरामद किया गया था। यह बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि शिकार कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
कार्रवाई पर उठते सवाल
वन विभाग की ओर से शिकार रोकने के प्रयास अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा पा रहे हैं। कई मामलों में कार्रवाई घटनाओं के बाद तक सीमित रह जाती है, जिससे शिकारियों के हौसले कम होने के बजाय बढ़ते नजर आ रहे हैं।
शिकारियों के खुलासे ने बढ़ाई चिंता
बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में पकड़े गए शिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने इंद्रावती क्षेत्र में बाघों का शिकार किया था। बाघों को उनकी खाल, दांत और तांत्रिक गतिविधियों के लिए मारा जा रहा है।
राज्य में बाघों की स्थिति
राज्य में वर्ष 2025 तक बाघों की कुल संख्या 35 बताई गई है। इनमें Achanakmar Tiger Reserve में 18, Tamor Pingla Tiger Reserve में 7 और इंद्रावती में 6 बाघ मौजूद हैं। वहीं Udanti Sitanadi Tiger Reserve और अन्य क्षेत्रों में भी सीमित संख्या में बाघ पाए गए हैं।
संरक्षण योजनाओं पर उठते सवाल
राज्य स्तर पर बाघों के संरक्षण के लिए योजनाएं बनाई गई हैं और अन्य राज्यों से बाघ लाने की प्रक्रिया भी जारी है, लेकिन इंद्रावती में लगातार हो रहे शिकार ने इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


