Tribal Games Rising Star : खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ की 12 वर्षीय तैराक सपना कोर्सा ने भले ही मेडल नहीं जीता, लेकिन उनके जज्बे ने हर किसी को प्रभावित कर दिया। प्रतियोगिता में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी होने के बावजूद उन्होंने बड़े खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुकाबला किया। उनके प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत किया, जो (Young Athlete Story) को खास बनाता है।
200 मीटर फ्री-स्टाइल में चुनौती, उम्र से दोगुने खिलाड़ियों से मुकाबला
सपना ने 200 मीटर फ्री-स्टाइल इवेंट में हिस्सा लिया, जहां उनके सामने 2 से 10 साल बड़े प्रतिभागी थे। बाकी खिलाड़ियों ने जहां 2 मिनट 39 सेकंड से 2 मिनट 58 सेकंड के बीच रेस पूरी की, वहीं सपना ने 4 मिनट 27 सेकंड में फिनिश किया। हालांकि समय में अंतर रहा, लेकिन उन्होंने रेस को बीच में नहीं छोड़ा—यही बात उन्हें (Swimming Challenge) का असली फाइटर बनाती है।
“मुकाबला खुद से था”, सपना ने दिखाई असली स्पोर्ट्समैन स्पिरिट
रेस के बाद सपना ने कहा कि जब वे पीछे रह गईं, तब उनका मुकाबला दूसरों से नहीं बल्कि खुद से था। अगर वे बीच में रुक जातीं, तो यह खुद से हार मानने जैसा होता। उनकी यही सोच (Never Give Up) की मिसाल बन गई, जिसने हर किसी को प्रेरित किया।
बीजापुर से राष्ट्रीय मंच तक, एक साल में तय किया लंबा सफर
बीजापुर जिले की रहने वाली सपना ने केवल एक साल पहले ही स्विमिंग शुरू की थी। उनके पिता किसान हैं और आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण उन्हें बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पाईं। इसके बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर यह साबित कर दिया कि जुनून हो तो रास्ते खुद बनते हैं। यह (Journey Story) कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।
छोटे पूल में प्रैक्टिस, बड़े मंच पर संघर्ष
सपना जिस पूल में अभ्यास करती हैं, वह केवल 25 मीटर का है, जबकि राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं 50 मीटर के पूल में होती हैं। यही वजह रही कि उन्हें रेस के दौरान अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ा। रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के पूल में उन्हें सीमित समय ही मिल पाया, जो (Training Gap) को साफ दिखाता है।
कोच का बयान—प्रतिभा है, बस सुविधाओं की जरूरत
कोच दीप्ति वर्मा के अनुसार, यह सपना का पहला राष्ट्रीय मुकाबला था और अनुभव की कमी के बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में खेल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते खिलाड़ियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर सही ट्रेनिंग और डाइट मिले, तो ऐसे खिलाड़ी बड़े स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
उम्मीदें जगीं—ट्राइबल गेम्स के बाद बदल सकती है तस्वीर
कोच और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि ट्राइबल गेम्स के बाद क्षेत्र में खेल सुविधाओं में सुधार होगा। सपना जैसी प्रतिभाओं को बेहतर प्लेटफॉर्म और संसाधन मिले, तो वे आने वाले समय में बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं। फिलहाल, उनका जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी जीत बन गया है।


