सीजी भास्कर, 06 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। उम्रकैद की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत ने बड़ी राहत देते हुए इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजीव मेहता की बेंच ने जोगी को निर्देश दिया है कि वे 20 अप्रैल से पहले अपनी मुख्य याचिका (SLP) दाखिल करें, ताकि उस दिन मामले का अंतिम निपटारा किया जा सके।
वरिष्ठ वकीलों की दलील- “सुना ही नहीं गया पक्ष”
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की ओर से दिग्गज वकीलों की फौज मैदान में उतरी। कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाने में जल्दबाजी की और ‘नेचुरल जस्टिस’ (प्राकृतिक न्याय) का गला घोंटा गया है। वकीलों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद अमित जोगी को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना ही सजा सुना दी गई, जो सीधे तौर पर अधिकारों का हनन है।
हाईकोर्ट की वेबसाइट और ‘पैरा 37’ का सस्पेंस
सुनवाई के दौरान जोगी के पक्ष ने एक चौंकाने वाला तथ्य रखा। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट का जो विस्तृत फैसला (जिसके पैरा 37 में कथित तौर पर बिना सुनवाई का जिक्र है) सोमवार सुबह ही वेबसाइट पर अपलोड हुआ। इस देरी और प्रक्रियात्मक खामियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर 20 अप्रैल को अंतिम सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
“अन्याय के खिलाफ न्याय की आस”, अमित जोगी का संदेश
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के तुरंत बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा – “माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश स्वागत योग्य है। मुझे पूरा यकीन है कि मेरे साथ जो गंभीर अन्याय हुआ है, उसे अब शीर्ष अदालत सुधारेगी। सत्य की जीत होकर रहेगी।” अब सबकी नजरें 20 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि छत्तीसगढ़ के इस सबसे चर्चित हत्याकांड में कानून का रुख क्या रहता है।


