सीजी भास्कर, 09 अप्रैल । क्रिकेट के महाकुंभ यानी वनडे विश्व कप 2027 की सुगबुगाहट अभी से तेज (ODI World Cup 2027) हो गई है। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए क्वालीफिकेशन की जंग अपने चरम पर है। नियम के मुताबिक, आईसीसी रैंकिंग की टॉप-8 टीमों को तो सीधा टिकट मिल जाएगा, लेकिन बाकी जगहों के लिए आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 में टीमें पसीना बहा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस रेस में मेजबान देश नामीबिया ही बुरी तरह फंसता नजर आ रहा है, जबकि कुछ ‘अंडरडॉग’ टीमों ने टॉप-4 में अपनी जगह पक्की कर ली है।
मेजबान होकर भी नामीबिया को क्यों नहीं मिली डायरेक्ट एंट्री? (ODI World Cup 2027)
अक्सर देखा जाता है कि मेजबान देशों को विश्व कप में खेलने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती, लेकिन नामीबिया के साथ कहानी अलग है। नामीबिया आईसीसी का ‘फुल मेंबर’ नहीं बल्कि एक ‘एसोसिएट मेंबर’ है, जिसकी वजह से उसे डायरेक्ट एंट्री का फायदा नहीं मिला है। उसे बाकी टीमों की तरह क्वालीफायर की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। लीग-2 की ताजा अंक तालिका (Points Table) नामीबिया के लिए किसी बुरे सपने जैसी है। टीम फिलहाल आठ टीमों की लिस्ट में छठे स्थान पर खिसक गई है, जिससे अगले राउंड में पहुंचने की उसकी उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं।
इन 4 टीमों का दबदबा, अमेरिका और स्कॉटलैंड सबसे आगे
लीग-2 के ताजा अपडेट्स की बात करें तो अमेरिका (USA) की टीम 36 अंकों के साथ मजबूती से नंबर-1 की कुर्सी पर जमी हुई है। वहीं, स्कॉटलैंड 32 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर है और उसका अगले राउंड में जाना लगभग तय माना (ODI World Cup 2027) जा रहा है। असली लड़ाई तीसरे और चौथे नंबर के लिए है, जहां फिलहाल ओमान (29 अंक) और नीदरलैंड्स (28 अंक) का कब्जा है। ओमान ने हाल के दिनों में गजब का खेल दिखाया है और नामीबिया को लगातार दो मैचों में धूल चटाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। अब सारा दारोमदार आने वाले मुकाबलों पर टिका है।
नामीबिया के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति
नामीबिया के पास अब सिर्फ 10 मैच बचे हैं और अगर वह अपने सभी मैच जीत भी लेता है, तो भी वह अधिकतम 40 अंकों तक ही पहुंच पाएगा। ऐसे में उसकी किस्मत अब दूसरी टीमों के हार-जीत (ODI World Cup 2027) पर भी टिकी है। 10 अप्रैल को ओमान और 12 अप्रैल को स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले नामीबिया के लिए फाइनल की तरह हैं। अगर टीम यहां हारती है, तो टॉप-4 का सपना पूरी तरह टूट जाएगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि टॉप-4 से बाहर होने पर भी उनके पास ‘क्वालीफायर प्लेऑफ’ के जरिए वापसी का एक कठिन रास्ता बचा रहेगा, लेकिन वह डगर किसी भी लिहाज से आसान नहीं होने वाली है।


