रिपोर्टर -ऐश कुमार
सीजी भास्कर, 30 मई। सुहेला क्षेत्र के ग्राम बिटकुली में बुधवार को मनरेगा कार्यस्थल पर उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज (MGNREGA) नहीं हो सकी। सुबह से काम कर रहे श्रमिकों ने जब हाजिरी दर्ज कराने की कोशिश की तो तकनीकी समस्या सामने आ गई। इससे मजदूरों और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने विरोध जताना शुरू कर दिया।
कार्यस्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि डिजिटल व्यवस्था के नाम पर नई प्रणाली लागू तो कर दी गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। मजदूरों को डर था कि यदि हाजिरी दर्ज नहीं होगी तो उनकी मजदूरी भी प्रभावित हो सकती है।
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली बनी परेशानी : MGNREGA
जानकारी के अनुसार ग्राम बिटकुली में मनरेगा के तहत कार्य चल रहा था। मजदूर सुबह तय समय पर पहुंचे और नियमित रूप से काम शुरू किया। लेकिन उपस्थिति दर्ज करने के दौरान ग्रामजी ऐप सही तरीके से काम नहीं कर पाया। कुछ श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हो रही थी जबकि कई मजदूरों का नाम बार बार प्रयास के बाद भी दर्ज नहीं हो सका। इससे काम कर रहे लोगों में असंतोष बढ़ गया।
मजदूरों ने किया विरोध
तकनीकी समस्या से नाराज मजदूरों और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि यदि उपस्थिति दर्ज करने वाली व्यवस्था ही काम नहीं करेगी तो मजदूरी मिलने में परेशानी आएगी। ग्रामीणों ने मांग की कि जब तक डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाती, तब तक पहले की उपस्थिति प्रणाली को जारी रखा जाए।
मजदूरी को लेकर बढ़ी चिंता
मजदूरों ने सवाल उठाया कि पूरे दिन मेहनत करने के बावजूद यदि हाजिरी दर्ज नहीं होगी तो उनकी मजदूरी का भुगतान कैसे होगा। ग्रामीणों का कहना था कि तकनीकी खामी का नुकसान श्रमिकों को नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि ऐसी स्थिति में प्रशासन के पास वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं है।
कागज पर दर्ज करनी पड़ी उपस्थिति
विरोध बढ़ने के बाद मौके पर मौजूद मेट और जिम्मेदार कर्मचारियों ने कागज और पेन के माध्यम से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और श्रमिकों की चिंता कुछ हद तक दूर हुई। हालांकि ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी यही समस्या बनी रही तो मजदूर काम पर आने से परहेज कर सकते हैं।
रोजगार को लेकर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर बड़े दावे किए (MGNREGA) जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश मजदूरों को सीमित दिनों तक ही काम मिल पाता है। ऐसे में यदि उपलब्ध काम के दौरान भी उपस्थिति दर्ज नहीं होगी तो श्रमिकों की आर्थिक स्थिति और अधिक प्रभावित होगी।
डिजिटल व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
ग्राम बिटकुली की इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में लागू डिजिटल व्यवस्थाओं की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े (MGNREGA) कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी नई प्रणाली को लागू करने से पहले उसकी तकनीकी मजबूती सुनिश्चित की जानी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के बाद ही उसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए ताकि मजदूरों के अधिकार और उनकी मजदूरी सुरक्षित रह सके।




