सीजी भास्कर, 24 मई : छत्तीसगढ़ में अब गांव-गांव के भू-जल स्तर पर डिजिटल निगरानी शुरू हो गई है। जल संरक्षण और भू-जल प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए राज्य में ‘(Jaldoot App)’ के जरिए वास्तविक भू-जल डाटा जुटाने की बड़ी पहल शुरू की गई है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर बलरामपुर जिले में जलदूत ऐप के माध्यम से भू-जल स्तर मापन और डाटा अपलोड करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कलेक्टर और जिला पंचायत अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में सभी जनपद पंचायतों के ग्राम रोजगार सहायकों, तकनीकी सहायकों और पंचायत सचिवों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायतों के खुले कुओं का प्री-मानसून 2026 का वास्तविक भू-जल डाटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई।
अब हर गांव से जुटेगा असली भू-जल डाटा
अधिकारियों ने बताया कि ‘(Ground Water Monitoring)’ को मजबूत बनाने के लिए जलदूत ऐप के जरिए हर साल मानसून से पहले और बाद का डाटा एकत्र किया जाएगा। इससे भू-जल स्तर में होने वाले बदलावों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा और जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान आसान होगी।
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को एक ही निर्धारित बिंदु से जल स्तर मापने, मेजरिंग टेप के सही उपयोग और वास्तविक आंकड़े दर्ज करने के निर्देश दिए गए। साथ ही फोटो अपलोड करने, मोबाइल नंबर और तकनीकी जानकारी सही तरीके से दर्ज करने की प्रक्रिया भी सिखाई गई।
जल संरक्षण योजनाओं को मिलेगा नया आधार
अधिकारियों के मुताबिक ग्राम स्तर से मिलने वाला सटीक डाटा भविष्य की जल संरक्षण योजनाओं, जल स्रोतों के पुनर्भरण और ग्रामीण जल प्रबंधन रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह पहल आने वाले समय में भू-जल संरक्षण की दिशा बदल सकती है।
राज्य में ‘(Water Conservation)’ को लेकर शुरू की गई यह डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे गांवों में भू-जल की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार होगा और योजनाएं जमीन की जरूरत के हिसाब से बनाई जा सकेंगी।
Jaldoot App से क्या होंगे बड़े फायदे
गांव-गांव का वास्तविक भू-जल डाटा तैयार होगा
मानसून से पहले और बाद की स्थिति की निगरानी
जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान आसान
जल संरक्षण योजनाएं होंगी ज्यादा प्रभावी
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
ग्रामीण जल प्रबंधन को मिलेगा तकनीकी आधार



