सीजी भास्कर, 08 जुलाई। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महादेव ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने के आरोप में रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई भारतीय जांच एजेंसियों की ओर से जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर की गई है। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज कर दी है। (Mahadev App Case)
फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचा, हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद : Mahadev App Case
बताया जा रहा है कि सौरभ चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था। वहां से निकलकर उसने कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया। गिरफ्तारी के बाद उसे मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उसके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अवैध तरीके से ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी पैरवी के लिए मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।
हजारों करोड़ के महादेव ऐप घोटाले का मुख्य आरोपी
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI कर रही हैं। जांच एजेंसियां हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी हुई हैं।
रेड नोटिस हटाने की याचिका पहले ही हो चुकी थी खारिज : Mahadev App Case
हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर ने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन CCF ने स्पष्ट किया कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।
भारत प्रत्यर्पण की तैयारी में, ओमान के कानून में कड़ी सजा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CCF में सुनवाई के दौरान ही सौरभ चंद्राकर UAE छोड़कर ओमान पहुंच गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल प्रत्यर्पण प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का उपयोग गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।



