सीजी भास्कर 17 अप्रैल
राजनांदगांव। जिले के नंदई क्षेत्र में 31 अगस्त 2022 को हुआ दोहरा हत्याकांड सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि संगठित और घातक हमले का मामला था। करीब चार साल की सुनवाई और साक्ष्यों की पड़ताल के बाद अदालत ने इस केस में 11 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना चार साल पहले की है। आरोपियों ने एकजुट होकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
आरोपियों ने विकास उर्फ कन्हैया सारथी को निशाना बनाते हुए उस पर चाकू, तलवार और डंडों से लगातार हमला किया था, जिसके चलते मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस बीच झगड़ा रोकने की कोशिश कर रहे जितेंद्र साहू को भी हमलावरों ने नहीं छोड़ा। उसे कन्हैया का साथी समझकर चाकू मार दिया। घायल हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इस तरह एक मामूली विवाद ने दो लोगों की जान ले ली और मामला दोहरे हत्याकांड में बदल गया।
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। घटना स्थल से खून से सनी मिट्टी, हथियार और अन्य भौतिक साक्ष्य जब्त किए गए। आसपास के घर से DVR (CCTV) फुटेज भी कब्जे में लिया गया, जिससे घटनाक्रम की पुष्टि हुई। इसके अलावा गवाहों के बयान, आरोपियों के मेमोरेंडम और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने केस को मजबूत आधार दिया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराएं 147, 148, 149 (दंगा), 302 (हत्या), 120-बी (षड्यंत्र) और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत चालान पेश किया।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि आरोपी न सिर्फ समूह में थे, बल्कि हथियारों के साथ पूर्व नियोजित तरीके से हमला करने पहुंचे थे। अदालत ने जिन 11 आरोपियों को दोषी ठहराया, उनमें मोहन लाल यादव, छगन उर्फ बिल्लू उर्फ कल्लू साहू, सोहेल खान उर्फ सोनू, दुर्गेश उर्फ दुग्गू नेताम, ओमप्रकाश सिन्हा उर्फ राजा, रूपेश उर्फ लक्की नेताम, कुशल साहू उर्फ भैरव, सुनील यादव उर्फ सेठी, प्रशांत उर्फ गोलू पवार, अमित गोंड और पुलकित केमे शामिल हैं। सभी को आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड की सजा दी गई है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में दो आरोपियों सुमित यादव और राहुल उर्फ लक्ष्मण पवार को बरी कर दिया गया।


