सीजी भास्कर, 10 जून : कभी नमक, तेल और दैनिक जरूरतों का सामान खरीदने (Abujhmad Development) के लिए 30 से 40 किलोमीटर तक पैदल सफर करने को मजबूर रहने वाले अबूझमाड़ के ग्रामीणों की जिंदगी अब बदलने लगी है। लंबे समय तक देश के सबसे दुर्गम और विकास से दूर माने जाने वाले इस क्षेत्र में पहली बार नियमित हाट बाजार शुरू हुआ है। नारायणपुर जिले के पद्मकोट और जाटलूर क्षेत्र में लग रहे इस बाजार ने आसपास के 20 से 25 गांवों के पांच हजार से अधिक ग्रामीणों को बड़ी राहत दी है।
अब ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए महाराष्ट्र या दूर-दराज के अन्य बाजारों तक नहीं जाना पड़ रहा है। गांव के नजदीक ही किराना, सब्जी, कपड़े, कृषि उपकरण और घरेलू उपयोग की सामग्री उपलब्ध होने लगी है, जिससे लोगों का समय, पैसा और मेहनत तीनों की बचत हो रही है।
नमक-तेल के लिए भी करना पड़ता था लंबा संघर्ष
अबूझमाड़ के कई गांव वर्षों तक सड़क और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। यहां रहने वाले ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई बार सामान खरीदने के लिए निकले लोगों को रात जंगलों में ही बितानी पड़ती थी।
बरसात के दिनों में हालात और भी मुश्किल हो जाते थे। उफनते नाले, कच्चे रास्ते और संचार सुविधाओं की कमी के कारण बाजार तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसे में ग्रामीणों को कई बार जरूरत का सामान समय पर नहीं मिल पाता था।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद बदली तस्वीर
पदमकोट और आसपास का इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा। सुरक्षा कारणों से यहां विकास कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने, नए कैंप स्थापित होने और सड़क निर्माण कार्यों में तेजी आने से हालात बदलने लगे हैं।
सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद व्यापारियों ने भी इस क्षेत्र की ओर रुख करना शुरू किया। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों का परिणाम यह रहा कि अब यहां नियमित हाट बाजार का संचालन शुरू हो गया है। बाजार में दूर-दराज के व्यापारी भी पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को बेहतर विकल्प और उचित कीमत पर सामान उपलब्ध हो रहा है।
ग्रामीणों को मिल रही बड़ी राहत
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले एक दिन का पूरा समय केवल सामान खरीदने में निकल जाता था, लेकिन अब गांव के पास बाजार लगने से जीवन काफी आसान हो गया है। महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है। अब कृषि कार्यों के लिए जरूरी सामग्री और घरेलू सामान आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि बाजार शुरू होने से न केवल सुविधाएं बढ़ी हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं। लोग अपने कृषि उत्पाद और वन उपज भी बाजार में बेच पा रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आय का रास्ता खुला है।
मुख्यधारा से जुड़ रहा अबूझमाड़
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह केवल हाट बाजार की शुरुआत नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के विकास और मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि नियमित बाजार लगने से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। आने वाले समय में क्षेत्र में और अधिक विकास कार्यों के जरिए अबूझमाड़ को नई पहचान देने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
अबूझमाड़ में वर्षों बाद दिख रही यह सकारात्मक तस्वीर इस बात का संकेत है कि विकास की रोशनी धीरे-धीरे उन इलाकों तक भी पहुंच रही है, जो कभी देश के सबसे दुर्गम और उपेक्षित क्षेत्रों में गिने जाते थे।



