सीजी भास्कर, 14 दिसंबर। सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से 12 जून को लंदन (Ahmedabad Plane Crash) के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के भयावह हादसे को आज छह महीने पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसका साया अब भी अहमदाबाद के मेघनिनगर इलाके पर छाया हुआ है। बीजे मेडिकल कॉलेज का होस्टल परिसर, जहां विमान गिरा था, आज भी उस त्रासदी की खामोश गवाही दे रहा है।
जहां कभी छात्रों की आवाजाही, हंसी और चहल-पहल रहती थी, वहां अब जले हुए पेड़, झुलसी दीवारों वाली इमारतें और एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है। पूरे इलाके को बैन घोषित कर (Ahmedabad Plane Crash) दिया गया है और आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक है। हादसे के अवशेष—जली हुई कारें, मोटरसाइकिलें, टेढ़े-मेढ़े पलंग और किताबों के जले हुए पन्ने—आज भी उस भयावह दोपहर की कहानी बयां करते हैं।
260 मौतों का दर्द, पूरे इलाके पर असर
इस विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। इस त्रासदी ने न केवल होस्टल परिसर को उजाड़ा, बल्कि आसपास रहने वाले सैकड़ों परिवारों की जिंदगी भी हमेशा के लिए बदल दी। हादसे के बाद से मेघनिनगर का यह इलाका शोक और डर के माहौल से बाहर नहीं निकल पाया है।
स्थानीय दुकानदार महेंद्र सिंह जडेजा उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, “दोपहर बहुत गर्म थी, बाहर कम लोग थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। हम सब घबराकर दुकान से बाहर (Ahmedabad Plane Crash) भागे। आज भी जब कोई विमान ऊपर से गुजरता है, तो अनायास नजर आसमान की तरफ उठ जाती है।”
‘आज भी सुरक्षित महसूस नहीं होता’
हादसे वाली जगह के पास रहने वाली टीनाबेन के लिए यह घटना आज भी किसी डरावने सपने से कम नहीं है। वे कहती हैं, “एयरपोर्ट पास में होने के बावजूद यह इलाका हमेशा सुरक्षित लगता था, लेकिन उस दिन सब बदल गया।” बातचीत के दौरान जैसे ही एक विमान ऊपर से गुजरा, वे चौंककर आसमान की ओर देखने लगीं और बोलीं, “आज भी डर लगता है, अब पहले जैसा भरोसा नहीं रहा।”
छह महीने बाद भी जांच अधूरी
हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन जांच अब भी जारी (Ahmedabad Plane Crash) है। अटूल्यम-4 होस्टल भवन और आसपास के पूरे क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। सुरक्षा के लिहाज से यहां लगातार गार्ड तैनात किए गए हैं।
सिविल हॉस्पिटल से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार अभी तक इस क्षतिग्रस्त स्थल के भविष्य को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं कर पाई है। इस जगह को फिर से कैसे विकसित किया जाए, या इसे किसी स्मारक के रूप में संरक्षित रखा जाए—इस पर अभी स्पष्ट निर्णय नहीं हो सका है।
फिलहाल विमान के मलबे और अन्य सबूतों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही इस क्षेत्र को लेकर अगला कदम तय किया जाएगा। तब तक यह इलाका आम जनता के लिए पूरी तरह बंद रहेगा।





