सीजी भास्कर, 09 जून : सरगुजा संभाग के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Ambikapur Medical College Hospital ) के निर्माण में हो रही लगातार देरी अब सियासी मुद्दा बन गई है। करीब चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अस्पताल भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। अस्पताल परियोजना को लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
निर्माण में देरी पर सरकार ने कांग्रेस को घेरा
प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अस्पताल निर्माण में हुई देरी के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री भूपेश बघेल के बीच समन्वय की कमी और आपसी मतभेदों का खामियाजा इस महत्वपूर्ण परियोजना को भुगतना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक खींचतान के कारण समय पर वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय नहीं लिए जा सके, जिससे अस्पताल निर्माण का कार्य वर्षों तक प्रभावित रहा।
टीएस सिंहदेव का पलटवार
वित्त मंत्री के बयान पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को सत्ता में आए ढाई वर्ष से अधिक समय हो चुका है। यदि सरकार चाहती तो अब तक अस्पताल निर्माण पूरा कराया जा सकता था। सिंहदेव ने कहा कि जनता को सुविधाएं देने के बजाय सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लगातार पिछली सरकार पर दोषारोपण कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्तमान सरकार ने अब तक इस परियोजना को पूरा करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
मेडिकल कॉलेज को दो बार मिला ‘जीरो ईयर’
अस्पताल भवन अधूरा रहने का सीधा असर मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप अस्पताल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मेडिकल कॉलेज को दो बार ‘जीरो ईयर’ का दर्जा मिल चुका है। इसका असर एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग पर पड़ रहा है। मेडिकल शिक्षा में अस्पताल का महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन भवन तैयार नहीं होने से छात्रों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जिला अस्पताल के भरोसे चल रही व्यवस्था
फिलहाल मेडिकल कॉलेज के लिए जिला अस्पताल को संबद्ध अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी है और एनएमसी के सभी मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल प्रशिक्षण देने के लिए समर्पित मेडिकल कॉलेज अस्पताल का जल्द शुरू होना जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था में छात्रों को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
100 करोड़ की अतिरिक्त स्वीकृति, फिर भी काम अधूरा
सरकार का दावा है कि परियोजना को पूरा करने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की जा चुकी है। निर्माण एजेंसी को कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार इस परियोजना पर अब तक करीब 366 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके अस्पताल भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृतियों और तकनीकी प्रक्रियाओं में देरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
जनता और छात्रों को इंतजार
अस्पताल निर्माण में देरी से सबसे अधिक प्रभावित सरगुजा संभाग की जनता और मेडिकल छात्र हैं। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल शुरू होने से उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी, लेकिन परियोजना के अधूरे रहने से यह सपना अभी भी अधूरा है। अब सरकार का दावा है कि निर्माण कार्य में जल्द तेजी लाई जाएगी, जबकि विपक्ष लगातार जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मुद्दा स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।



