सीजी भास्कर, 02 मई। दक्षिण भारत की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राजनीतिक गलियारों में कई महीनों से जिस फैसले को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, उसने अब नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब आगे होने वाली गतिविधियों पर टिक गई हैं।
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कई स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों और नई संभावनाओं को लेकर चल रही चर्चाओं ने इस घटनाक्रम को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में राजनीतिक तस्वीर किस दिशा में जाएगी, इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपा इस्तीफा : Annamalai Resignation
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।
नई राजनीतिक राह की अटकलें
पिछले कई महीनों से यह चर्चा चल रही थी कि अन्नामलाई पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। इसी बीच उनके नई राजनीतिक पार्टी बनाने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई थीं। तमिलनाडु के विभिन्न इलाकों में इस संबंध में पोस्टर लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
दो दिन में स्थिति स्पष्ट करने की बात
नई पार्टी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अन्नामलाई ने सोमवार को कहा था कि वह अगले दो दिनों में अपनी स्थिति (Annamalai Resignation) साफ करेंगे। दिल्ली रवाना होने से पहले चेन्नई हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही थी।
शिक्षा नीति को लेकर जताई थी आपत्ति
हाल ही में उन्होंने नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए लागू की गई तीन भाषा व्यवस्था का विरोध किया था। उन्होंने संबंधित अधिसूचना वापस लेने की मांग भी उठाई थी। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
चुनावी रणनीति को लेकर बढ़ी दूरी
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में विभिन्न सहयोगी दलों को गठबंधन में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में पार्टी नेतृत्व ने उनके स्थान पर नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी।
गठबंधन और सीटों पर नहीं बनी सहमति
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुए राजनीतिक गठबंधनों के बाद अन्नामलाई और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने की चर्चाएं (Annamalai Resignation) सामने आईं। उम्मीदवार चयन, सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाने की बातें भी सामने आती रही हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि अन्नामलाई आगे क्या राजनीतिक फैसला लेते हैं।




