सीजी भास्कर, 28 अप्रैल : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार करने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। केजरीवाल के इस ‘सत्याग्रह’ वाले कदम पर अब कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केजरीवाल के इस फैसले को न्यायपालिका के लिए चुनौती करार दिया है। इस (Arvind Kejriwal Court Row) ने इंडिया गठबंधन के भीतर भी एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सहयोगी दल ही आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
“जज को नहीं मानेंगे तो क्या आरोपी रिहा होगा
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि खुद को ‘आम आदमी’ कहने वाले नेता आज देश की न्यायपालिका को चुनौती दे रहे हैं। रंधावा ने सवाल उठाया कि “अगर कल कोई अपराधी यह कह दे कि वह जज के अधिकार को नहीं मानता, तो क्या अदालत उसे रिहा कर देगी?” उन्होंने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए पूछा कि क्या यह सीधी तौर पर अदालत की अवमानना नहीं है? रंधावा ने (Arvind Kejriwal Court Row) के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में खुद संज्ञान (Suo Motu) लेने की अपील भी की है।
केजरीवाल का ‘अंतरात्मा’ वाला फैसला और सत्याग्रह
इससे पहले, अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश होने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने कहा, “जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है। अपनी अंतरात्मा की आवाज और गांधी जी के सिद्धांतों का पालन करते हुए मैंने यह फैसला लिया है कि मैं इस मामले में उनके सामने पेश नहीं होऊंगा।” केजरीवाल का यह रुख (Arvind Kejriwal Court Row) को कानूनी लड़ाई से ज्यादा एक राजनीतिक आंदोलन की ओर मोड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो खुद पेश होंगे और न ही उनका कोई वकील दलील पेश करेगा।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर कांग्रेस का तंज
सांसद रंधावा ने केजरीवाल के राजनीतिक बैकग्राउंड का हवाला देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए न्यायपालिका की बात मानने से इनकार नहीं कर सकता क्योंकि वह राजनीति से जुड़ा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक व्यक्ति भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा है और फिर कहता है कि मैं आपकी बात नहीं मानूंगा। कांग्रेस की इस तीखी प्रतिक्रिया ने (Arvind Kejriwal Court Row) को और अधिक हवा दे दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयानबाजी से ‘आप’ और कांग्रेस के रिश्तों में फिर से कड़वाहट आ सकती है।
क्या है पूरा कानूनी विवाद
यह पूरा मामला दिल्ली के चर्चित शराब घोटाला मामले से जुड़ा है। 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को इस मामले में बरी कर दिया था। हालांकि, सीबीआई (CBI) ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहाँ वर्तमान में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान केजरीवाल का असहयोग वाला रवैया (Arvind Kejriwal Court Row) की मुख्य वजह बना है।
न्यायपालिका के सामने संवैधानिक संकट
केजरीवाल के इस फैसले ने कानूनविदों के बीच भी एक नई चर्चा शुरू कर दी है। क्या कोई आरोपी जज के प्रति अविश्वास जताकर कार्यवाही का बहिष्कार कर सकता है? रंधावा का कहना है कि अगर ऐसी परंपरा शुरू हुई तो न्यायपालिका आगे कैसे बढ़ेगी। (Arvind Kejriwal Court Row) के इस मोड़ पर अब सबकी नजरें हाई कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या अदालत केजरीवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करेगी या उनकी अनुपस्थिति में ही सुनवाई आगे बढ़ाएगी।


