सीजी भास्कर, कांकेर, 21 अक्टूबर। रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला सड़क (Bharatmala Highway Quality Test) पर उद्घाटन से पहले दरार आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की जांच अब तेज कर दी गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की स्थानीय टीम के साथ दिल्ली मुख्यालय के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर सड़क की अलग-अलग परतों से नमूने लिए हैं। जानकारी के मुताबिक, गुणवत्ता की जांच के लिए कुल 15 तरह के परीक्षण किए जाएंगे। स्वतंत्र जांच के लिए दिल्ली की एनएबीएल लैब से भी सैंपलिंग कराई गई है।
करोड़ों रुपये की इस परियोजना में दरार आने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं निर्माण सामग्री, सड़क की परतों की मोटाई, कम्पैक्शन या पानी की निकासी में कोई खामी तो नहीं रही। इन परीक्षणों से सड़क की ऊपरी सतह से लेकर नीचे की परतों तक की मजबूती का आकलन किया जाएगा। एनएचएआई ने संबंधित निर्माण एजेंसी को नोटिस भी जारी किया है।
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सड़क बनी, लेकिन किसानों और बच्चे परेशान
रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे (Bharatmala Highway Quality Test) के निर्माण के बाद स्थानीय ग्रामीणों के सामने आवागमन की समस्या भी सामने आई है। कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच मालवीपारा पंचायत के किसानों का कहना है कि हाईवे के कारण उनके खेतों तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो गया है।
किसान उत्तम साहू, देवेंद्र नेताम और लोखनाथ मंडावी ने बताया कि खेतों तक जाने में परेशानी हो रही है। वहीं, गांव के पूर्व उपसरपंच हनुमान पांडेय के मुताबिक, हाईवे के दूसरी ओर हाईस्कूल है। स्कूल के लिए नई जमीन तलाश की गई है। ग्रामीणों ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल की व्यवस्था करने की मांग की थी।
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जांच तेज, सड़क की मरम्मत भी
कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच मालवीपारा के पास सड़क पर दरार आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे। मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद एनएचएआई ने प्रभावित हिस्से से नमूने लेकर जांच शुरू की है।
अब विभागीय जांच के साथ थर्ड पार्टी जांच भी कराई जा रही है। इन जांचों से दरार आने के कारणों और संभावित जिम्मेदारी का पता लगाने में मदद मिलेगी। फिलहाल संबंधित सड़क हिस्से की मरम्मत कर दी गई है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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करीब 4,146 करोड़ रुपये लागत
रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना (Bharatmala Highway Quality Test) के तहत छत्तीसगढ़ में छह लेन हाईवे की लंबाई करीब 125 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना की लागत लगभग 4,146 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी परियोजना में सड़क पर दरार आने के बाद गुणवत्ता जांच को अहम माना जा रहा है।
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सड़क की गुणवत्ता परखने के लिए कौन-कौन से टेस्ट होंगे
सड़क की मजबूती और निर्माण मानकों की जांच के लिए अलग-अलग तकनीकी परीक्षण किए जाते हैं। इनमें सड़क की परतों, निर्माण सामग्री और संरचनात्मक क्षमता का आकलन शामिल है।
- कोर कटिंग टेस्ट: सड़क की बिटुमिनस परत की मोटाई, बनावट और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण की जांच की जाती है।
- बिटुमिन कंटेंट टेस्ट: डामर में बिटुमिन की मात्रा तय मानकों के अनुसार है या नहीं, इसका पता लगाया जाता है।
- एग्रीगेट ग्रेडेशन टेस्ट: सड़क निर्माण में इस्तेमाल गिट्टी और अन्य कणों के आकार तथा उनके अनुपात की जांच होती है।
- फील्ड डेंसिटी और कम्पैक्शन टेस्ट: मिट्टी और निर्माण की परतों को निर्धारित स्तर तक दबाया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाती है।
- फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर टेस्ट: सड़क पर नियंत्रित भार डालकर उसके झुकाव को मापा जाता है। इससे सड़क की संरचनात्मक क्षमता का आकलन किया जाता है।
- रोड रफनेस टेस्ट: सड़क की सतह कितनी समतल है और उसमें कितना उतार-चढ़ाव है, इसका तकनीकी मापन किया जाता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में 15 परीक्षणों का उल्लेख है, लेकिन इनमें से केवल छह परीक्षणों के नाम और विवरण दिए गए हैं। बाकी नौ परीक्षणों की जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी सूची स्पष्ट हो सकेगी।
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एनएचएआई अधिकारी ने क्या कहा
एनएचएआई छत्तीसगढ़ के धमतरी पीआईयू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शमशेर सिंह ने मीडिया से चर्चा में कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला सड़क पर बासनवाही-मालवीपारा के आसपास जहां दरारें आई थीं, वहां से नमूने लिए गए हैं। विभागीय जांच जारी है और थर्ड पार्टी से भी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क पर दरार किन कारणों से आई और निर्माण की गुणवत्ता में कोई कमी थी या नहीं।
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