रायपुर, 13 अगस्त : मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने जबलपुर-मंडला-चिल्फीघाटी-कवर्धा-सिमगा होते हुए रायपुर तक 6-लेन एक्सप्रेसवे (Chhattisgarh 6 Lane Expressway) परियोजना को मंजूरी दी है। करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से कवर्धा समेत कई जिलों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
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जबलपुर-रायपुर के बीच घटेगा सफर का समय
जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा-चिल्फीघाटी-कवर्धा-सिमगा-रायपुर मार्ग को 6 लेन में विकसित किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर और रायपुर के बीच सड़क यात्रा का समय लगभग आधा होने की उम्मीद है। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, परिवहन और पर्यटन को भी गति मिलेगी। बताया गया है कि जबलपुर से रायपुर पहुंचने में फिलहाल करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं। 6-लेन कॉरिडोर बनने के बाद यह समय करीब 3.5 से 4 घंटे तक रह सकता है।
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कवर्धा को मिलेगा इंटर-स्टेट कॉरिडोर का फायदा
प्रस्तावित Chhattisgarh 6 Lane Expressway मध्यप्रदेश के जबलपुर और मंडला से होते हुए छत्तीसगढ़ की चिल्फीघाटी में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा होते हुए रायपुर से जुड़ेगा। कवर्धा के लिए यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से कवर्धा की मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होगी। व्यापारिक वाहनों के लिए यात्रा समय कम होने से परिवहन लागत में भी कमी आने की संभावना है।
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चिल्फीघाटी में पहाड़ की कटिंग होगी बड़ी चुनौती
इस पूरे कॉरिडोर में चिल्फीघाटी का हिस्सा सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। नागमोरी घाटी के नीचे पालक से घाटी के ऊपर चिल्फी तक करीब 8 किलोमीटर लंबे घाट मार्ग पर वर्तमान में सड़क दो लेन की है। मैदानी इलाकों में सड़क चौड़ी करने के लिए जमीन का विस्तार आसान होता है, लेकिन घाटी में दोनों तरफ पहाड़ होने के कारण 6 लेन के लिए पर्याप्त चौड़ाई जुटाना चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसे में कई स्थानों पर पहाड़ की कटिंग करनी पड़ सकती है।
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भूस्खलन रोकने के लिए बनानी होंगी सुरक्षा संरचनाएं
पहाड़ की कटिंग के बाद ढलानों को स्थिर रखना भी परियोजना की बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा संरचनाएं, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य तकनीकी उपाय किए जाने होंगे। बारिश के दौरान चिल्फी क्षेत्र में पानी और मिट्टी के तेज बहाव को देखते हुए भूस्खलन रोकने की व्यवस्था भी जरूरी होगी। परियोजना की डिजाइन और निर्माण में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।
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वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की भी आशंका
6 लेन की सड़क के लिए कैरिजवे के साथ मीडियन, शोल्डर, सुरक्षा दीवार और ड्रेनेज जैसी संरचनाओं के लिए भी अतिरिक्त जगह की जरूरत होगी। चिल्फीघाटी के मौजूदा दो लेन मार्ग को 6 लेन में बदलने के लिए कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर पहाड़ की कटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
इस दायरे में आने वाले वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई भी संभावित है। ऐसे में परियोजना के दौरान पर्यावरणीय स्वीकृतियों और वन क्षेत्र से जुड़े नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण होगा।
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व्यापार और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
6-लेन एक्सप्रेसवे (Chhattisgarh 6 Lane Expressway) बनने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच माल परिवहन आसान होने की उम्मीद है। इससे उद्योग, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। रायपुर, कवर्धा, मंडला और जबलपुर जैसे शहरों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की संभावना है।
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