Bhoramdev Tiger Safari : कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य से एक बार फिर उत्साहजनक संकेत सामने आए हैं। जंगल में लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघ, बाघिन और उनके शावकों की साफ तस्वीरें रिकॉर्ड हुई हैं। इन फुटेज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भोरमदेव अब केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि स्थायी बाघ आवास का क्षेत्र बनता जा रहा है।
अलग-अलग रेंज में सक्रिय हैं बाघ
वन विभाग के अनुसार, प्रभूझोल, चिल्फी, बेंदा, झलमला और अभ्यारण्य के भीतरू इलाकों में बाघों की गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। फिलहाल चार से अधिक बाघ और बाघिन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शांत वातावरण और घने वन क्षेत्र ने यहां बाघों को टिकने का भरोसा दिया है।
शावकों के साथ बाघिन का ठहराव अहम संकेत
इस बार सबसे अहम तथ्य यह है कि बाघिनें अपने शावकों के साथ लंबे समय से इसी क्षेत्र में देखी जा रही हैं। यह दर्शाता है कि जंगल में भोजन, सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन अनुकूल स्थिति में है। नियमित शिकार गतिविधियां और विचरण पैटर्न भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है।
मध्यप्रदेश से बढ़ा वन्यजीव दबाव
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि पड़ोसी राज्यों के बड़े टाइगर रिजर्व में बढ़ती संख्या के कारण बाघ नए और शांत इलाकों की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं। भोरमदेव का घना वन क्षेत्र, सीमित मानवीय दखल और प्राकृतिक जलस्रोत उन्हें आकर्षित कर रहे हैं।
सुरक्षा बढ़ी, लोकेशन रखी गई गोपनीय
बाघों की सक्रियता के बाद वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई मार्गों पर पगचिह्न मिलने के बाद गश्त बढ़ा दी गई है। सुरक्षा कारणों से बाघों की सटीक लोकेशन साझा नहीं की जा रही है, ताकि वन्यजीवों को किसी तरह का खतरा न हो और उनका प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित न हो।
पर्यटकों के लिए जंगल सफारी की तैयारी
वन विभाग अब भोरमदेव क्षेत्र में जंगल सफारी शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अप्रैल या मई से आम पर्यटकों के लिए सफारी शुरू हो सकती है। संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी एजेंसी को सौंपी गई है और टिकट बुकिंग ऑनलाइन की जाएगी।
स्थानीय रोजगार और संरक्षण को मिलेगा बल
सफारी शुरू होने से इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। गाइड, वाहन चालक और सहायक सेवाओं से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, यह पहल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की सफलता का मजबूत संकेत मानी जा रही है।


