कोरबा। Bike Theft Mastermind Case में पुलिस ने उस युवक को गिरफ्तार कर लिया है जिसे परिजन पिछले दस साल से मरा हुआ मान बैठे थे। 27 वर्षीय जयसिंह पटेल जंगल में पेड़ों के बीच गुप्त पनाहगाह बनाकर रह रहा था और वहीं से बाइक चोरी की वारदातों का जाल बुनता था (Forest Hideout)। पुलिस ने उसके कब्जे से 14 बाइकें बरामद की हैं, जबकि वह अपनी असली पहचान छिपाकर इलाके में अलग-अलग तरीकों से घूमता था।
खदान क्षेत्र में चोरी की घटना ने खोले गिरोह के सुराग
मामला उस समय खुला जब खदान क्षेत्र से एक रोलर चोरी होने की शिकायत पुलिस तक पहुँची। जांच के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि जंगल के भीतर एक व्यक्ति लंबे समय से रह रहा है, जो कभी खुलकर सामने नहीं आता। पुलिस टीम जब मौके पर पहुँची तो झोपड़ी में मिले युवक के पास कोई पहचान पत्र नहीं था, न ही उसने अपनी उम्र या पता बताने में रुचि दिखाई। सख्ती से पूछताछ पर उसकी असली कहानी सामने आई।
तीन सदस्यीय गिरोह, रेकी से लेकर चोरी तक सब कुछ योजनाबद्ध
पूछताछ में जयसिंह ने कबूल किया कि उसने दो साथियों—अनस खान और शिवचरण—के साथ मिलकर बाइक चोरी का गिरोह बनाया था। ये लोग पहले रेकी करते, फिर मौका मिलते ही बाइक उड़ा लेते। चोरी की बाइकों को कम कीमत में बेचकर पैसा तीनों में बांट लिया जाता था। दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि जयसिंह खुद को अमीर और प्रभावशाली बताकर कई महिलाओं से रिश्ते बना चुका था, जबकि उसकी वास्तविक जिंदगी जंगल की झोपड़ी तक सीमित थी।
परिजनों ने मान लिया था मृत, एक दशक से कोई संपर्क नहीं
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी पिछले दशक से अपने परिवार से दूर था। जयसिंह घर से इस तरह गायब हुआ कि उसके परिजनों को लगा वह अब इस दुनिया में नहीं है। किसी से भी उसका संपर्क नहीं था, न उसने कभी घर लौटने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, वह अपराध की दुनिया में गहराई तक उतर चुका था और जंगल को अपने लिए सुरक्षित ठिकाना मानता था।
गिरोह के अन्य सदस्य और खरीदार भी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने बताया कि गिरोह के दोनों सक्रिय सदस्य—अनस खान और शिवचरण—को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं चोरी की बाइकें खरीदने वालों में रामप्रसाद रोहिदास, लालजी यादव और इमरान अंसारी को भी हिरासत में लिया गया है। सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और पुरानी घटनाओं की कड़ियाँ जोड़ने में जुटी है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह गिरोह और कहाँ-कहाँ सक्रिय रहा है।


