सीजी भास्कर, 19 नवंबर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, यात्रियों (Bilaspur Jharsuguda Project) को सुरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध रेल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए अधोसंरचना विकास में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। क्षमता आवर्धन के कार्यों को तीव्र गति से क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे परिचालन की दक्षता बढ़ने के साथ-साथ यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।
इसी क्रम में, बिलासपुर–झारसुगुड़ा (Bilaspur Jharsuguda Project) चौथी रेल लाइन परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में प्रगति पर है। यह व्यस्त रेल मार्ग उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी है, जहाँ ट्रेनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु नई लाइनों का निर्माण कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है।
वर्तमान में 206 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है, जिसमें से लगभग 155 किलोमीटर से अधिक का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इसी क्रम में सारागांव देवरी रेलवे स्टेशन को चौथी लाइन से जोड़ने हेतु प्री-एनआई एवं एनआई का कार्य पूरा किया गया है।
इस महत्त्वपूर्ण कार्य के दौरान 02 पुराने टर्नआउट हटाकर 04 नए टर्नआउट स्थापित किए गए। करीब 1100 मीटर नई रेलवे लाइन बिछाकर एक अतिरिक्त लूप लाइन का निर्माण किया गया, जिससे भविष्य में अधिक गाड़ियों का सुचारु संचालन संभव होगा। नई लाइन के साथ स्टेशन पर अत्याधुनिक सिग्नलिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली लगाई गई है, जिसमें डुअल VDU, कवच-रेडी इंटरफेस और पॉइंट हज़ार्ड सर्किट जैसे सुरक्षा मानकों को शामिल किया गया है।
इस चुनौतीपूर्ण कार्य में 300 से अधिक कर्मचारी, 10 इंजीनियर, 10 स्टेशन मास्टर और 03 मुख्य यातायात निरीक्षक ठंडे मौसम के बावजूद दिन-रात लगातार जुटे रहे। आधुनिक तकनीक और समर्पित प्रयासों के साथ स्टेशन को भविष्य के उच्च-सुरक्षा और उच्च-क्षमता वाले रेल संचालन के लिए तैयार किया गया है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (Bilaspur Jharsuguda Project) का यह प्रयास यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और परिचालन दक्षता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद न केवल रेल संचालन क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी होगी, बल्कि यात्रियों को सmoother, safer और अधिक time-bound यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।



