Bilaspur Train Accident मामले में रेलवे ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए डीओपी पद पर तैनात एम. आलम को तत्काल प्रभाव से छुट्टी पर भेज दिया है। जांच में सामने आया कि खड़ी मालगाड़ी के पास से गुजरने वाली मेमू ट्रेन के संचालन और लोको पायलट की ड्यूटी लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी।
उनकी जगह अब इस पद पर टीआरडी विभाग के विवेक कुमार को जिम्मेदारी दी गई है। परिचालन संबंधी चूक की आशंका के चलते यह फैसला लिया गया है।
कैसे हुआ था हादसा
4 नवंबर की शाम लगभग 4:10 बजे collision incident गतौरा–लालखदान ओवरब्रिज के बीच उस वक्त हुआ, जब गेवरारोड–बिलासपुर मेमू लोकल खड़े मालगाड़ी रैक से भिड़ गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि मेमू ट्रेन के कोच मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गए और यात्री डिब्बों में चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही राहत दल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुँचीं और देर रात तक रेस्क्यू अभियान चलता रहा।
Bilaspur Train Accident – मरने वालों की संख्या और घायलों की हालत
अब तक 14 यात्रियों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि लगभग 20 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों का इलाज शहर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है और कई की हालत अभी भी नाजुक है।
डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों की निगरानी लगातार ICU स्तर की हो रही है, क्योंकि चोटें अत्यधिक गंभीर हैं।
जांच में क्या मिला संकेत
रेलवे की तकनीकी और ऑपरेशनल टीम लगातार जांच में जुटी है। शुरुआती परीक्षण में duty roster negligence के संकेत मिले हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जिम्मेदारी तय करने के लिए डेटा रिकॉर्डर, वायरिंग सिस्टम और ट्रेन ऑपरेशन के मिनट-टू-मिनट लॉग की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
एम. आलम को हटाने का निर्णय इन्हीं प्रारंभिक निष्कर्षों के बाद लिया गया है। आगे और विभागीय कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।
Bilaspur Train Accident – स्थानीय लोगों के सवाल और सुरक्षा पर चिंता
हादसे के बाद क्षेत्र में रेल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
स्थानीय लोगों ने ट्रेन संचालन की निगरानी मजबूत करने, खड़े रैक के चिन्हांकन में सुधार और रात के समय अतिरिक्त गाइडलाइन लागू करने की मांग उठाई है।
रेल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए संचालन प्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।


