सीजी भास्कर, 15 जुलाई। पाकिस्तान एक ओर डिजिटल संपत्तियों और क्रिप्टो कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम (Bitcoin Fatwa) बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर एक धार्मिक फैसले ने इस पूरी बहस को नया मोड़ दे दिया है। देश के प्रमुख इस्लामी विद्वानों में शामिल मुफ़्ती मुहम्मद तकी उस्मानी की ओर से जारी फतवे के बाद क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
इस घटनाक्रम ने सिर्फ निवेशकों का ध्यान ही नहीं खींचा, बल्कि पाकिस्तान की डिजिटल एसेट नीति और क्रिप्टो अपनाने की योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि फतवा धार्मिक राय होती है, कानूनी प्रतिबंध नहीं। इसके बावजूद पाकिस्तान जैसे देश में इसका सामाजिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है।

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फतवे में क्या कहा गया Bitcoin Fatwa
दारुल उलूम कराची से जुड़े मुफ़्ती मुहम्मद तकी उस्मानी ने अपने फतवे में कहा कि उपलब्ध शोध और विशेषज्ञों की राय के आधार पर क्रिप्टोकरेंसी को शरिया के अनुसार वैध संपत्ति नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने बिटकॉइन, एथेरियम, यूएसडीटी और अन्य क्रिप्टो टोकन के जरिए खरीद बिक्री और लेनदेन को धार्मिक दृष्टि से अनुचित बताया।
पाकिस्तान की क्रिप्टो नीति पर पड़ सकता है असर
हाल के महीनों में पाकिस्तान सरकार डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने और क्रिप्टो उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे समय में यह फतवा आम लोगों की सोच और निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान सरकार ने क्रिप्टो नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।
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क्या ट्रंप से जुड़े प्रोजेक्ट पर भी असर पड़ेगा Bitcoin Fatwa
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में डिजिटल भुगतान और स्टेबलकॉइन से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा चल रही थी। चूंकि फतवे में स्टेबलकॉइन का भी उल्लेख किया गया है, इसलिए यदि बड़ी संख्या में लोग इस धार्मिक राय का पालन करते हैं तो ऐसे प्रोजेक्ट की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर सरकार की नीतियों, नियामकीय फैसलों और बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
कानूनी और धार्मिक पक्ष अलग
विशेषज्ञों का कहना है कि फतवा एक धार्मिक मत या व्याख्या (Bitcoin Fatwa) है, यह अपने आप में कानून नहीं होता। इसलिए किसी भी क्रिप्टोकरेंसी की वैधता या प्रतिबंध का फैसला संबंधित देश की सरकार और उसके नियामक संस्थान करते हैं।



