रिपोर्टर : एसकुमार साहू
सीजी भास्कर, 26 जून : बलौदाबाजार जिले के सुहेला क्षेत्र के ग्राम बिटकुली में खदान की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। खदान संचालक द्वारा राजस्व अधिकारियों के साथ भूमि सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही करीब 250 से 300 ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। (Bitkuli Mine Land Dispute) को लेकर ग्रामीणों ने खनन क्षेत्र के विस्तार, शासकीय भूमि के उपयोग और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विरोध बढ़ने पर मामला थाना सुहेला तक पहुंच गया, जहां प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति शांत हुई।
सीमांकन शुरू होते ही ग्रामीणों ने जताया विरोध
जानकारी के अनुसार खदान संचालक रिपुसूदन वर्मा ने राजस्व विभाग और पटवारी के माध्यम से अपनी भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था। जैसे ही अधिकारी सीमांकन के लिए मौके पर पहुंचे, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। (Bitkuli Mine Land Dispute) के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान के लिए स्वीकृत सीमा से अधिक क्षेत्र में खनन किया गया है।
स्वीकृत चार एकड़ के बजाय सात एकड़ में खनन का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि खदान के लिए लगभग चार एकड़ भूमि की अनुमति दी गई थी, लेकिन वास्तविकता में करीब सात एकड़ क्षेत्र में उत्खनन किया गया। इससे पहले भी ग्रामीणों ने इसी स्थान पर अवैध कचरा डंपिंग और जमीन समतलीकरण का विरोध किया था। विरोध के बाद कचरा हटाया गया था, लेकिन दोबारा सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होने से (Bitkuli Mine Land Dispute) फिर से गरमा गया।
मंदिर के नाम पर मांगी गई जमीन निजी नाम पर कैसे हुई दर्ज?
विवाद के बीच ग्रामीणों ने जमीन के स्वामित्व को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया है। ग्राम पंचायत के सरपंच दिनेश चौरे और पूर्व सरपंचों का कहना है कि कई पंचवर्षीय से खदान संचालक इसी भूमि को मंदिर निर्माण के नाम पर आवंटित करने के लिए आवेदन देता रहा है। ग्रामीणों ने सवाल किया कि जब जमीन मंदिर निर्माण के लिए मांगी जा रही थी, तो वही भूमि निजी नाम पर कैसे दर्ज हो गई। उन्होंने पूरे राजस्व रिकॉर्ड और भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
खदान संचालक ने बताया जमीन अपनी, ग्रामीणों ने की शिकायत
खदान संचालक रिपुसूदन वर्मा का कहना है कि संबंधित जमीन उनके नाम दर्ज है और वे केवल अपनी भूमि का सीमांकन कराने पहुंचे थे। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण थाना सुहेला पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने की मांग की।
प्रशासन की समझाइश के बाद लौटे ग्रामीण, जांच की मांग बरकरार
तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीण मौके से लौट गए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि चारागाह और शासकीय भूमि को किसी भी कीमत पर खदान के लिए उपयोग नहीं करने दिया जाएगा। (Bitkuli Mine Land Dispute) के दौरान सरपंच दिनेश चौरे, पूर्व सरपंच जनकुराम साहू, पूर्व सरपंच बुद्धेलाल वर्मा, वरिष्ठ नागरिक परदेशीराम वर्मा, मक्सूदन साहू, जागेंद्र बघेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद रहीं। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



