सीजी भास्कर, 12 जनवरी। नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम बोरपाल (ग्राम पंचायत बोरपाल) में रविवार को आदिवासी परंपराओं के विपरीत शव दफनाने को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पारंपरिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और ग्राम समाज की सहमति के बिना मृत व्यक्ति को दफनाया गया, जबकि गांव के गायता और पटेल द्वारा इसका विरोध किया गया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में शव दफनाने का विवाद (Burial Dispute) गहराता नजर आ रहा है।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बोरपाल सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि 24 घंटे के भीतर शव को निकालकर परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक शव दफनाने का मामला नहीं, बल्कि गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
ग्रामीणों ने जिला दंडाधिकारी और एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए मृतक का परंपरागत अंतिम संस्कार कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी समाज में अंतिम संस्कार की परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और किसी भी स्थिति में उनकी अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि मतांतरण के नाम पर परंपरागत रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे शव दफनाने का विवाद (Burial Dispute) जैसे हालात बन रहे हैं और सामाजिक समरसता प्रभावित हो रही है।
प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
गौरतलब है कि यह विवाद नारायणपुर जिले में बीते कुछ वर्षों से सामने आ रहे सामाजिक तनावों की कड़ी से जुड़ा माना जा रहा है। वर्ष 2023 में जिले के एड़का गांव में मतांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था, जब आरोपों के बाद आदिवासी समुदाय ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था और एक चर्च पर हमला भी हुआ था। उस घटना में पुलिस अधिकारियों समेत कई लोग घायल हुए थे और हिंसा, सामुदायिक वैमनस्य तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। वर्तमान शव दफनाने का विवाद (Burial Dispute) को भी ग्रामीण उसी पृष्ठभूमि में देख रहे हैं।


