सीजी भास्कर, 18 अप्रैल : छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने जा रही जनगणना को लेकर शिक्षकों ने विरोध (Census Duty Protest) जताया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद कठिन और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। इस निर्णय को अव्यवहारिक बताते हुए उन्होंने शासन से पुनर्विचार की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि मई-जून की भीषण गर्मी में डोर-टू-डोर सर्वे करना संभव नहीं है। छुट्टियों के दौरान जब स्कूल बंद रहते हैं, उसी समय फील्ड में काम सौंपना शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है।
शिक्षकों के अनुसार, एक तरफ गर्मी की छुट्टियों में स्कूल बंद रहते हैं, वहीं दूसरी ओर इसी समय उन्हें जनगणना ड्यूटी (Census Duty Protest) के लिए फील्ड में भेजा जा रहा है। लंबे समय तक धूप में रहकर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि इससे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि मौसम की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी गर्मी में लगातार घर-घर जाकर जानकारी जुटाना व्यावहारिक नहीं है और इससे शिक्षकों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यह मुद्दा अब शिक्षक विरोध (Census Duty Protest) के रूप में सामने आ रहा है।
शिक्षक संघ ने जनगणना की समय-सीमा और प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। साथ ही, स्मार्टफोन के अनिवार्य नियम को लेकर भी नाराजगी जताई गई है, क्योंकि कई शिक्षकों के पास पुराने मोबाइल हैं।
शिक्षकों ने यह भी बताया कि शासन के निर्देशानुसार जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड मोबाइल में कम से कम 12.0 वर्जन होना जरूरी किया गया है। ऐसे में जिनके पास पुराने स्मार्टफोन हैं, उन्हें नया मोबाइल खरीदना पड़ेगा। इस अनिवार्यता (Census Duty Protest) को लेकर भी असंतोष जताया गया है।
छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होगी जनगणना
राज्य में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। कर्मचारी तय समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।
इस बार जनगणना प्रक्रिया (Census Duty Protest) को डिजिटल बनाया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। ऑनलाइन जानकारी भरने वाले लोगों को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिसे बाद में सर्वे कर्मचारियों को दिखाना होगा।
33 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी जानकारी
जनगणना के इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग (रहवासी या व्यावसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा या पक्का), परिवारों की संख्या और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं का भी ब्यौरा लिया जाएगा।
साथ ही घर में रहने वाले लोगों की संख्या और उपयोग किए जाने वाले वाहनों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया (Census Duty Protest) को लेकर शिक्षकों ने व्यावहारिक सुधार की मांग की है, ताकि उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।


