सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ के वनांचल जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों की ओर रुख करने वाले खूंखार वन्यजीवों के आतंक की एक बेहद संवेदनशील, डरावनी और रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। मकड़ी ब्लॉक की अमरावती रेंज अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिंजोरी में उस समय अचानक चीख-पुकार और हड़कंप मच गया, जब घने जंगलों की गुफाओं से निकलकर एक विशालकाय भालू सीधे आबादी वाले इलाके और लहलहाते खेतों की तरफ आ धमका। शाम के धुंधलके में जब ग्रामीणों ने इस आक्रामक और भारी-भरकम भालू को अपनी ही गलियों के मुहाने पर खड़े देखा, तो पूरे गांव में मौत का सन्नाटा पसर गया। इस अप्रत्याशित वन्यजीव दस्तक (CG Binjori Bear Panic) के बाद से बिंजori और उसके आसपास के आश्रित गांवों में दहशत का ऐसा माहौल बन गया है कि लोग अपने ही घरों के भीतर दुबकने को मजबूर हो गए हैं।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल एक भालू के दिखने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सस्पेंस और डर छुपा हुआ है जो सीधे तौर पर ग्रामीणों की जिंदगी और उनकी रोजमर्रा की आजीविका को प्रभावित कर रहा है। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच, जब ग्रामीणों को सुबह-शाम खेतों की तरफ जाना बेहद जरूरी है, ठीक उसी वक्त भालू के इस खौफनाक मूवमेंट ने किसानों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। जैसे ही भालू के बस्ती की ओर बढ़ने की खबर फैली, ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशालें जलाकर उसे वापस खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक वह जंगल के मुहाने और खेतों के आसपास ही मंडराता देखा गया। इस जानलेवा खतरे (CG Binjori Bear Panic) की सूचना तत्काल वन विभाग के आला अफसरों को दी गई, जिसके बाद हड़कंप मच गया।
अकेले खेत गए तो खैर नहीं!
पर्दे के पीछे का असली सस्पेंस और चुनौती यह है कि बिंजोरी पंचायत से लगे अमरावती रेंज के जंगलों में पिछले कुछ दिनों से जंगली हिंसक जानवरों का इंसानी बस्तियों की तरफ आना अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की सुस्त गश्त के कारण यह मूक जानवर अब गांवों के भीतर घुसकर मवेशियों और इंसानों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए वन अमले की स्पेशल रेस्क्यू टीम ने कड़ा कदम (CG Binjori Bear Panic) उठाते हुए पूरे इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों के लिए एक बेहद सख्त और आक्रामक गाइडलाइन जारी की है।
अमरावती रेंज के अधिकारियों ने गांव में ढिंढोरा पिटवाकर साफ तौर पर मुनादी करा दी है कि कोई भी ग्रामीण अब भूलकर भी अकेले जंगल या अपने खेतों की तरफ न जाए। विशेषकर छोटे बच्चों और महिलाओं को घरों के भीतर या सुरक्षित स्थानों पर ही रखने की हिदायत दी गई है, क्योंकि भालू का गुस्सा किसी भी मासूम की जान पर भारी नुकसान (CG Binjori Bear Panic) पहुंचा सकता है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय समूह में रहें, हाथों में लाठी-डंडे और टॉर्च रखें तथा भालू की किसी भी तरह की हलचल या नई लोकेशन दिखने पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करें।
दहशत के साए में कट रही रातें
बिंजोरी पंचायत के सरपंच और बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि अगर वक्त रहते वन विभाग ने इस आक्रामक भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया या उसे जंगल के गहरे कोर एरिया में नहीं खदेड़ा, तो यह पूरा इलाका किसी बड़ी मानवीय त्रासदी का गवाह बन सकता है। गांव की इस बदहाल और डरावनी स्थिति में बदलाव (CG Binjori Bear Panic) लाने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल ट्रेंकुलाइजर गन के साथ एक्सपर्ट्स की टीम तैनात करने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और वन विभाग के सामने चुनौती यह है कि यह भालू केवल भोजन और पानी की तलाश में भटक कर बाहर आया है, या फिर यह पूरी तरह हिंसक होकर आदमखोर होने की राह पर है? इस खौफनाक सवाल का जवाब ढूंढने के लिए वन विभाग का अमला पारंपरिक तरीकों को छोड़कर अब नए ट्रैकर ग्रिड के जरिए वन्यजीवों की मॉनिटरिंग का एक नया नियम (CG Binjori Bear Panic) जमीन पर लागू करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, बिंजोरी पंचायत में दहशत की तलवार लटकी हुई है और वन अमले की रेस्क्यू टीम की गति (CG Binjori Bear Panic) यह तय करेगी कि इस वनांचल गांव के लोगों को भालू के इस आक्रामक आतंक से कब तक मुक्ति मिलती है, या फिर आने वाले दिनों में यह खौफ और गहरा होने वाला है।




