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Home » CG Electricity Bill : महंगाई की मार के बीच जनता को करंट देने की तैयारी में छत्तीसगढ़ सरकार!

CG Electricity Bill : महंगाई की मार के बीच जनता को करंट देने की तैयारी में छत्तीसगढ़ सरकार!

By Newsdesk Admin
01/06/2026
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CG Electricity Bill
CG Electricity Bill

सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों (CG Electricity Bill) के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। प्रदेश में लगातार बढ़ती हुई कमरतोड़ महंगाई ने पहले ही आम जनता की रात की नींद और दिन का चैन छीन रखा है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले देवभोग दूध तक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद अब आम बिजली उपभोक्ताओं को भी एक बहुत बड़ा झटका लग सकता है।

Contents
  • आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका
  • बिजली कंपनी ने दिया घाटे का हवाला
  • खर्चों का बड़ा और उलझा हुआ हिसाब-किताब
  • जनसुनवाई के बाद अब फैसले की घड़ी

इस चालू माह यानी जून में ही राज्य के भीतर बिजली दरों में एक बार फिर उल्लेखनीय वृद्धि होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि नए वित्तीय सत्र के लिए बिजली का नया टैरिफ (दरें) तय करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया बिजली नियामक आयोग में अपने बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस संभावित फैसले से मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह से गड़बड़ाने की आशंका है।

आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका

यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब पूरा प्रदेश भीषण और झुलसाने वाली गर्मी (CG Electricity Bill) की चपेट में है। इस कड़े मौसम में एसी, कूलर और पंखों के लगातार चलने की वजह से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत पहले ही अपने ऐतिहासिक और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे नाजुक और कठिन समय में यदि बिजली नियामक आयोग द्वारा दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी की जाती है, तो इसका सीधा और बहुत ही तगड़ा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

खासकर उन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा जो पहले से ही सीमित आय में गुजारा कर रहे हैं। इसके साथ ही, छोटे व्यापारियों पर भी अपनी दुकानों और संस्थानों को चलाने का आर्थिक दबाव कई गुना और ज्यादा बढ़ सकता है। फिलहाल, प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं और सभी की नजरें बिजली नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। लोग ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी जेब पर यह अतिरिक्त भार न डाला जाए।

बिजली कंपनी ने दिया घाटे का हवाला

इस संभावित मूल्य वृद्धि के पीछे की असली कहानी और आंकड़ों को समझें, तो राज्य बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने नियामक आयोग के समक्ष अपनी एक विस्तृत याचिका दायर की है। इस याचिका में कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए करीब 6308.24 करोड़ रुपये के एक बहुत ही भारी-भरकम वित्तीय घाटे का अनुमान पेश किया है। पावर कंपनी का साफ तौर पर कहना है कि इतने बड़े घाटे के साथ व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना नामुमकिन है।

इसलिए, इस वित्तीय नुकसान की भरपाई करने के लिए राज्य की सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में बढ़ोतरी करनी होगी। कंपनी ने प्रस्ताव दिया है कि घरेलू, वाणिज्यिक (व्यापारिक) और औद्योगिक (फैक्ट्रियों) सभी प्रकार के टैरिफ में समान रूप से वृद्धि की जानी बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष जुलाई के महीने में घोषित किए गए टैरिफ में भी प्रति यूनिट लगभग 20 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके घाव अभी भरे भी नहीं थे कि एक बार फिर दरों में इस नए संशोधन की आशंका ने आम जनता की चिंता और ज्यादा बढ़ा दी है।

खर्चों का बड़ा और उलझा हुआ हिसाब-किताब

पावर कंपनी द्वारा आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कुल 25,460.30 करोड़ रुपये के भारी राजस्व की सख्त आवश्यकता होगी। इस विशाल बजट में सबसे बड़ा और मुख्य खर्च बाहरी स्रोतों से बिजली की खरीद पर होने वाला है, जो कि करीब 21,150.81 करोड़ रुपये का अनुमानित है।

इसके अतिरिक्त, कंपनी के कामकाज को चलाने के लिए 3,250.34 करोड़ रुपये संचारण एवं रखरखाव (मेंटेनेंस) पर खर्च होंगे, जबकि 429.50 करोड़ रुपये पुराने ऋणों के ब्याज को चुकाने में जाएंगे और 1,116.15 करोड़ रुपये अन्य प्रशासनिक खर्चों की श्रेणी में शामिल किए गए हैं। बिजली कंपनी का यह भी अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह खर्च घटने के बजाय और तेजी से बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2027-28 में कुल खर्च बढ़कर लगभग 27,306.02 करोड़ रुपये और वर्ष 2028-29 में यह आंकड़ा 30,307.93 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

जनसुनवाई के बाद अब फैसले की घड़ी

बिजली कंपनियों (CG Electricity Bill) के इन डराने वाले आंकड़ों और प्रस्तावों पर इसी साल फरवरी के महीने में राज्य स्तर पर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जिसमें कई उपभोक्ता संगठनों ने इस बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया था। इस जनसुनवाई के बाद आयोग ने पावर कंपनी से कुछ और अतिरिक्त और स्पष्ट दस्तावेज भी मांगे थे, जिनकी बारीकी से जांच की गई। अब इस समय छत्तीसगढ़ सरकार और नियामक आयोग के उच्च अधिकारियों के बीच अंतिम स्तर की गंभीर समीक्षा और चर्चा जारी है।

आयोग के सामने इस समय एक बहुत ही धर्मसंकट वाली स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां उसे बिजली कंपनियों की डूबती वित्तीय स्थिति को संतुलित और मजबूत करने की बड़ी तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक सरकार होने के नाते आम जनता और गरीब परिवारों को महंगाई से राहत देने का एक भारी सामाजिक और राजनैतिक दबाव भी बना हुआ है। यदि इस बार भी बिजली कंपनियों के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो छत्तीसगढ़ के हर घर का मासिक बजट बिगड़ना पूरी तरह से तय माना जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

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