सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ की ‘माटी’ में खरीफ सीजन की बुआई शुरू होने से ठीक पहले खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और किल्लत की झूठी अफवाहें फैलाकर भोले-भाले किसानों को लूटने वाले सिंडिकेट के खिलाफ साय सरकार ने पूरी तरह से आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए राजनांदगांव कलेक्टर जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में जिले के किसानों को समय पर खाद और उत्तम किस्म के बीज का वितरण करने के लिए सहकारिता तंत्र को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार ब्लैक मार्केटर्स की एक नहीं चलेगी, क्योंकि जिले में पिछले वर्ष की तुलना में रिकॉर्ड 34 प्रतिशत अधिक रासायनिक और वैकल्पिक उर्वरकों का बंपर स्टॉक पहले से ही गोदामों में सुरक्षित रख लिया गया है। इस बड़े और पारदर्शी प्रशासनिक कदम (CG Fertilizer Supply Plan) के बाद से जमाखोरों के खेमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि प्रशासन अब गांव-गांव जाकर सीधे अन्नदाता को खाद सौंप रहा है।
यह कोई सामान्य सरकारी वितरण प्रणाली का ढर्रा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सस्पेंस छुपा हुआ है जो सीधे तौर पर उन बिचौलियों की कमर तोड़ता है जो सीजन के पीक टाइम पर यूरिया और डीएपी की कृत्रिम किल्लत पैदा कर देते थे। उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि जिले में अब तक 14 हजार 972 से अधिक किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक सीधे सोसायटियों के माध्यम से खाद प्रदाय की जा चुकी है।
इस बार किसानों को फसलों की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए परंपरागत खाद के साथ-साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे वैज्ञानिक और वैकल्पिक माध्यमों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि अन्नदाता को खाद की मारामारी से बचाया जा सके। इस नई और मजबूत व्यवस्था (CG Fertilizer Supply Plan) ने ग्रामीण अंचलों में खेती की उम्मीदों को एक नया और सुरक्षित जीवनदान दिया है।
सोसायटियों में भरा पड़ा है स्टॉक
इस पूरी योजना के जमीनी और वास्तविक आंकड़ों का सस्पेंस खोलें तो राजनांदगांव जिले में सहकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 41 हजार 509 मीट्रिक टन खाद का एक विशाल स्टॉक डिपो में मौजूद है। इसमें अकेले 17 हजार 153 मीट्रिक टन यूरिया, 4 हजार 88 मीट्रिक टन डीएपी, 10 हजार 129 मीट्रिक टन एनपीके, 3 हजार 382 मीट्रिक टन एमओपी और 6 हजार 757 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट शामिल है। सरकार ने इस साल कुल 68 हजार 690 मीट्रिक टन खाद वितरण का एक बहुत ही महत्वाकांक्षी और आक्रामक लक्ष्य तय किया है, ताकि जैसे ही मानसून अपनी रफ्तार पकड़े, खेतों में खाद की एक बोरी की भी कमी न होने पाए।
पसीने से अपनी माटी को सींचने वाले किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासन ने 13 हजार 980 क्विंटल बीज भंडारण के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 6 हजार 036 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाला बीज सीधे बीज निगम के जरिए सुरक्षित कर लिया है। इसमें से 3 हजार 201 क्विंटल बीज को सोसायटियों के भीतर भेजकर 1 हजार 85 क्विंटल बीज का वितरण सीधे किसानों के हाथों में कर दिया गया है। इस बार वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए शासन के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी की पात्रता के आधार पर वितरण किया जा रहा है। इस सख्त और दूरदर्शी नियम (CG Fertilizer Supply Plan) के कारण बड़े भू-माफिया और रसूखदार लोग सोसायटियों से खाद की जमाखोरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को उनका हक बिना किसी सिफारिश के मिल रहा है।
5 निजी दुकानों के लाइसेंस हमेशा के लिए सस्पेंड
इस बड़ी तैयारी के बीच का सबसे आक्रामक और कड़क पहलू यह है कि जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, तस्करी, इंडस्ट्रियल डायवर्सन और अवैध जमाखोरी जैसी आपराधिक अनियमितताओं को नेस्तनाबूद करने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उडऩदस्ता टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक निजी और सहकारी केंद्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर रही हैं। तफ्तीश की इस आक्रामक गति (CG Fertilizer Supply Plan) का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निरीक्षण के दौरान भारी गड़बड़ी पाए जाने पर अब तक 28 खाद विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यही नहीं, नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 7 रसूखदार विक्रय केंद्रों में भंडारित अवैध उर्वरक की पूरी खेप को पुलिस की मौजूदगी में ज़ब्त करते हुए उन दुकानों को सील कर दिया गया है। इसके साथ ही, किसानों का शोषण करने वाले 5 निजी खाद विक्रेताओं के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। कृषि विभाग ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी कबाड़ या खाद माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल, राजनांदगांव प्रशासन की इस चौतरफा मुस्तैदी और भारी-भरकम स्टॉक ने यह साफ कर दिया है कि इस साल जिले के अन्नदाता को खाद और बीज के लिए किसी भी सहकारी समिति के सामने लाचार होकर लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, बल्कि गौरव के साथ उनके खेतों में फसलें लहलहाएंगी।




