सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से शासकीय मर्यादा को तार-तार करने वाला एक ऐसा सनसनीखेज और शर्मनाक मामला (CG Government Office Disgrace) सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की साख को बट्टे खाते में डाल दिया है। सरकारी दफ्तर, जहां आम जनता अपनी फरियाद लेकर पहुंचती है और जहां करोड़ों रुपये के धान का हिसाब-किताब रखा जाता है, उसे कुछ बददिमाग कर्मचारियों ने अय्याशी का खुला मयखाना बना डाला।
बालोद के मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र का एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने न केवल शासन की छवि को धूमिल किया है, बल्कि विभाग के भीतर चल रही मनमर्जी और लचर व्यवस्था का भी सस्पेंस खोलकर रख दिया है। इस घिनौने कृत्य के बाद पूरे परिक्षेत्र में (CG Government Office Disgrace) को लेकर आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है, क्योंकि सरकारी संपत्ति का ऐसा दुरुपयोग पहले कभी नहीं देखा गया।
यह पूरा मामला केवल दफ्तर में बैठकर जाम छलकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकारी गोपनीयता और मर्यादा की धज्जियां उड़ाने वाला है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस लोहे की सरकारी आलमारी में किसानों के धान के करोड़ों के दस्तावेज, पंजी और जरूरी कागजात सुरक्षित रखे होने चाहिए थे, वहां शासकीय दस्तावेजों को बेरहमी से हटाकर विदेशी शराब की बोतलें, चखना और डिस्पोजल ग्लास सजाकर रखे गए थे। रसूख के नशे में चूर इन कर्मचारियों को कानून या अपने उच्च अधिकारियों का रत्ती भर भी खौफ नहीं था। जैसे ही यह वीडियो ग्रामीणों के मोबाइल तक पहुंचा, वैसे ही लोगों का खून खौल उठा। इस घोर अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा कदम (CG Government Office Disgrace) उठाने की मांग को लेकर अब स्थानीय बेरोजगार युवाओं और किसानों ने कमान संभाल ली है।
अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस
मिली जानकारी के मुताबिक, धान संग्रहण केंद्र में पदस्थ दैनिक वेतनभोगी (कलेक्टर दर) कर्मचारी तिलेश्वर साहू अपने कुछ बाहरी और रसूखदार साथियों के साथ दफ्तर के भीतर यह हाई-प्रोफाइल शराब पार्टी आयोजित कर रहा था। ड्यूटी के घंटों के बाद सरकारी दफ्तर की बत्तियां जलाकर, टेबल पर बैठकर खुलेआम मदिरापान किया जा रहा था। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस और आक्रामक मोड़ तब आया जब इस गंभीर लापरवाही पर जिला विपणन अधिकारी टिकेंद्र राठौर से जवाब मांगने की कोशिश की गई। साहब ने सीधे तौर पर यह कहकर फोन काट दिया कि “मैं अभी छुट्टी पर हूं, मुझे कुछ नहीं पता।” एक जिम्मेदार अधिकारी की यह गैर-जिम्मेदाराना चुप्पी साफ बयां करती है कि निचले स्तर के इन शराबियों को कहीं न कहीं बड़े अफसरों का मूक संरक्षण प्राप्त है, जिससे सरकारी साख को हुए नुकसान (CG Government Office Disgrace) की चिंता किसी को नहीं है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। मालीघोरी के इस केंद्र में अक्सर रात के अंधेरे में संदिग्ध गाड़ियां आती हैं और दफ्तर के भीतर महफिलें सजती हैं। सरकारी खजाने की छाती पर बैठकर सरकारी कर्मचारी ही शासन के नियमों का मखौल उड़ा रहे हैं। जब दफ्तर के भीतर ही ऐसी अवैध गतिविधियां संचालित होंगी, तो वहां रखे करोड़ों के धान और सरकारी पैसों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। इस पूरे प्रशासनिक ढर्रे और व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव (CG Government Office Disgrace) करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है, क्योंकि जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले दफ्तरों को अय्याशी का अड्डा बनते देखना किसी भी सभ्य समाज के लिए मुमकिन नहीं है।
निलंबन और एफआईआर की मांग
इस शर्मनाक घटना के बाद बालोद जिले के जागरूक नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन को दोटूक अल्टीमेटम थमा दिया है। लोगों का कहना है कि तिलेश्वर साहू और उसके उन सभी साथियों को तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जाए जिन्होंने सरकारी दफ्तर को अपवित्र किया है। इसके साथ ही, सरकारी परिसर के भीतर अवैध रूप से शराबखोरी करने और शासकीय संपत्ति के विरूपण के मामले में संबंधित थाने में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए। यह मांग अब बालोद का एक नया नियम (CG Government Office Disgrace) बन चुकी है कि भ्रष्टाचार और सदाचार के नाम पर ऐसी नौटंकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी बालोद कलेक्टर और विपणन विभाग के आला अफसर इस मामले को दबाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं? क्या इन संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के पीछे किसी रसूखदार सफेदपोश नेता का हाथ है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और उस पूरे धान संग्रहण केंद्र का घेराव कर वहां प्रतीकात्मक रूप से शुद्धिकरण के लिए गंगाजल छिड़केंगे। बहरहाल, इस वायरल वीडियो ने शासन के प्रशासनिक दावों की हवा निकाल दी है। देखना होगा कि जांच की गति (CG Government Office Disgrace) क्या मोड़ लेती है और क्या वाकई इन भ्रष्ट और शराबी कर्मचारियों पर कोई ऐसी सख्त गाज गिरेगी जो पूरे प्रदेश के शासकीय अमले के लिए एक कड़ा नजीर साबित हो सके।




