सीजी भास्कर, 1 नवंबर। बहुचर्चित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज रिश्वतकांड (Rawatpura Medical College Bribery Case) में फंसे पांच आरोपितों को हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद रवि चंद्राकर, चैत्र श्रीधर, मयूर रावल, राघवन रंदीप नायर और अतुल कुमार तिवारी को जमानत दे दी है।
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपितों पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निरीक्षकों को अनुकूल रिपोर्ट के बदले रिश्वत देने का आरोप है। जांच एजेंसी ने बताया कि यह सौदा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया के दौरान हुआ था।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चार्जशीट 18,000 से अधिक पन्नों की है और 129 गवाह सूचीबद्ध किए गए हैं, जिससे मुकदमे के जल्द निपटारे की संभावना कम है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ देव और हर्षवर्धन परगनिहा ने गीतांजलि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मयूर रावल की ओर से पैरवी की। उन्होंने कहा कि रावल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। अन्य आरोपितों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने पक्ष रखा।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि निरीक्षण टीम प्रमुख डॉ. मंजप्पा सी.एन., सदस्य डॉ. चैत्रा एम.एस. और डॉ. अशोक शेलके, रायपुर के एसआरआईएमएसआर मेडिकल कॉलेज के निदेशक अतुल कुमार तिवारी, मंजप्पा के सहयोगी सथीशा ए., और रविचंद्र के. इस मामले में शामिल थे।
यह है पूरा मामला
मेडिकल कॉलेज जांचसूत्रों के अनुसार, नवा रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज (Rawatpura Medical College Bribery Case) में एनएमसी की निरीक्षण टीम को अनुकूल रिपोर्ट दिलाने के लिए करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई थी। सीबीआई ने मेडिकल कॉलेज के एडमिनिस्ट्रेटिव डायरेक्टर अतुल तिवारी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने कॉलेज के डॉ. अतीन कुंडू के घर पर भी छापा मारा था।
बताया गया है कि कॉलेज के मेडिकल डायरेक्टर रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पदस्थ हैं, लेकिन दोहरी नौकरी करते हुए प्राइवेट कॉलेज में भी सेवाएं दे रहे थे। सीबीआई का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए रिश्वत का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क में कई उच्च पदाधिकारी और निजी संस्थान भी शामिल थे।


