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CG High Court Order : नदियों में प्रदूषण पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, 30 दिन में मांगी डिस्टिलरी यूनिट्स की जांच रिपोर्ट

By Newsdesk Admin
02/06/2026
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CG High Court Order
CG High Court Order

सीजी भास्कर, 02 जून : छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली शिवनाथ और खारून नदी में बढ़ रहे कथित औद्योगिक प्रदूषण के मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने नदियों के अस्तित्व और जनस्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नदी किनारे संचालित शराब निर्माण करने वाली डिस्टिलरी फैक्ट्रियों की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एडवोकेट वैभव शुक्ला और अपूर्व त्रिपाठी को विशेष कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। माननीय न्यायालय ने दोनों कमिश्नरों को निर्देशित किया है कि वे जमीनी हकीकत का पता लगाकर अगले 30 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। इस कड़े फैसले से प्रशासनिक और औद्योगिक गलियारों में (CG High Court Order) को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है।

Contents
  • नदियों का पानी पूरी तरह सुरक्षित, ऑक्सीजन स्तर सामान्य’
  • भाटिया डिस्टिलरीज ने आरोपों को नकारा
  • मॉनिटरिंग सिस्टम मिला बंद
  • कोर्ट कमिश्नर करेंगे औचक संयुक्त निरीक्षण

नदियों का पानी पूरी तरह सुरक्षित, ऑक्सीजन स्तर सामान्य’

 

इस जनहित से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) की ओर से अदालत में एक आधिकारिक शपथ पत्र (Affidavit) प्रस्तुत किया गया। इस हलफनामे में सरकारी वकीलों ने दावा किया कि प्रदूषण की शिकायतें मिलने के बाद विभागीय अधिकारियों की एक विशेष टीम ने मौके पर जाकर गहनता से भौतिक सत्यापन और पानी की जांच की है।

शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में शिवनाथ और खारून नदी दोनों ही जगहों पर पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर पूरी तरह से सामान्य और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया है। सरकार के इस जवाब के बाद कोर्ट ने सच्चाई का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया।

भाटिया डिस्टिलरीज ने आरोपों को नकारा

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी डिस्टिलरी प्रबंधनों ने भी अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा। भाटिया डिस्टिलरीज की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने समाचारों और याचिकाओं में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से आधारहीन और तथ्यहीन करार दिया।

कंपनी प्रबंधन ने तकनीकी दलील देते हुए दावा किया कि उनके पूरे संयंत्र में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (Zero Liquid Discharge – ZLD) प्रणाली का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि उनके प्लांट से किसी भी प्रकार का रासायनिक या दूषित पानी बहकर बाहर नहीं जाता है और न ही उसे नदियों में छोड़ा जाता है। कंपनी ने कहा कि उनके खिलाफ प्रकाशित खबरें पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं।

मॉनिटरिंग सिस्टम मिला बंद

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कोर्ट को बताया कि नियमों का लगातार मखौल उड़ाने के कारण ‘वेलकम डिस्टिलरीज’ के खिलाफ पहले भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। मंडल ने पूर्व में इस कंपनी को पूरी तरह से बंद करने (क्लोजर ऑर्डर) का आदेश जारी किया था और भारी लापरवाही के चलते 54.60 लाख रुपए का तगड़ा पर्यावरणीय जुर्माना (Environmental Compensation) भी ठोका था।

मंडल के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि हाल ही में जब फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया गया, तब वेलकम डिस्टिलरीज का ऑनलाइन प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम (Online Pollution Monitoring System) जानबूझकर बंद पाया गया। इसके अलावा, प्लांट के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर भी तय सरकारी मानकों से कहीं अधिक दर्ज किया गया, जो पर्यावरण के लिए बेहद घातक है।

कोर्ट कमिश्नर करेंगे औचक संयुक्त निरीक्षण

सरकारी दावों और कंपनियों की सफाई में भारी विरोधाभास को देखते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि वे केवल कागजी दावों पर भरोसा नहीं करेंगे। कोर्ट ने जमीनी हकीकत जानने के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट वैभव शुक्ला और अपूर्व त्रिपाठी को पर्यावरण मंडल के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के साथ मिलकर संबंधित तीनों डिस्टिलरी यूनिट्स का संयुक्त और आकस्मिक निरीक्षण करने का जिम्मा सौंपा है।

अदालत ने सभी डिस्टिलरी प्रबंधनों को सख्त हिदायत दी है कि वे जांच प्रक्रिया में कोर्ट कमिश्नरों को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। यदि किसी भी स्तर पर रुकावट पैदा करने की कोशिश की गई, तो इसे सीधे कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा। दोनों कमिश्नरों को निरीक्षण की पूरी वीडियोग्राफी और साक्ष्यों के साथ 30 दिनों के भीतर अपनी संयुक्त रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। इस ऐतिहासिक (CG High Court Order) के बाद अब अगली सुनवाई रिपोर्ट मिलने के बाद तय की जाएगी।

 

 

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