सीजी भास्कर, 21 जुलाई : रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोढ़ी स्थित गधीया आर्द्रभूमि में दो दुर्लभ बत्तख प्रजातियों (Rare Ducks Raipur) की मौजूदगी दर्ज की गई है। यहां स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक एक साथ दिखाई दीं। इस दुर्लभ नजारे ने पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
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एक साथ दिखीं दो दुर्लभ बत्तख प्रजातियां
गधीया आर्द्रभूमि (Rare Ducks Raipur) में स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक को पानी के किनारे भोजन तलाशते और प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते देखा गया। सुबह के शांत माहौल में पक्षी प्रेमियों ने दोनों प्रजातियों को बिना किसी व्यवधान के देखा और कैमरे में कैद किया। पानी, हरियाली और खुले प्राकृतिक वातावरण के बीच इन पक्षियों की मौजूदगी ने गधीया आर्द्रभूमि (Wetland Biodiversity) की जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को और भी खास बना दिया।
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पक्षियों के लिए अनुकूल है आर्द्रभूमि
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही आर्द्रभूमि में कई पक्षी प्रजातियों का दिखाई देना इस बात का संकेत है कि यहां का जल, प्राकृतिक वनस्पति और पर्यावरण पक्षियों के रहने के लिए अनुकूल है। यहां उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो रहा है।
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संरक्षण से बढ़ेगी जैव विविधता
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे दृश्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। यदि स्थानीय समुदाय और प्रशासन के सहयोग से इन क्षेत्रों की नियमित देखभाल होती रही तो भविष्य में यहां और अधिक स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी देखने को मिल सकती है। इससे यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
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पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक जैसी प्रजातियां जलीय घास, कीट, घोंघे और छोटी मछलियां खाकर आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में मदद करती हैं। इनकी मौजूदगी किसी भी वेटलैंड के स्वस्थ होने का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। इसके अलावा ये पक्षी बीजों के प्रसार में भी भूमिका निभाते हैं, जिससे जलीय वनस्पतियों का विकास होता है और स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
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आर्द्रभूमि क्यों है महत्वपूर्ण Rare Ducks Raipur
आर्द्रभूमि पृथ्वी के महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है। यह ऐसे क्षेत्र होते हैं, जो स्थायी या मौसमी रूप से पानी से संतृप्त रहते हैं। दलदल, झीलें, नदी तट, बाढ़ के मैदान और मैंग्रोव इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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