सीजी भास्कर 2 मई I महिला को बहलाकर जंगल ले जाकर दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में दोषी को दी गई मृत्युदंड की सजा को हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि फांसी की सजा केवल ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में ही दी जानी चाहिए। (Change in sentence in rape-murder case)
यदि यह कसौटी पूरी नहीं होती, तो सजा को उम्रकैद में बदलना उचित है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यह उम्रकैद दोषी के शेष जीवन तक प्रभावी रहेगी। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया।
छुट्टी पर गांव आई थी महिला : Change in sentence in rape-murder case
मामले के अनुसार, बेमेतरा परिवार न्यायालय में भृत्य के पद पर कार्यरत 25 वर्षीय महिला 9 अगस्त 2022 को छुट्टी लेकर अपने गांव खैरमुड़ा आई थी। 14 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे वह स्कूटी से घर से निकली और परिजनों को बताया कि वह बेमेतरा जा रही है, लेकिन वह अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची और लापता हो गई।
गुमशुदगी के बाद शुरू हुई जांच
अगले दिन 15 अगस्त को पिता ने डभरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ के दौरान एक परिचित युवक पर संदेह हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपी महिला के संपर्क में था और उससे लगातार मोबाइल पर बात करता था। इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए।
आरोपी ने कबूला जुर्म : Change in sentence in rape-murder case
पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी शंकर निषाद, निवासी ग्राम सुखदा, थाना डभरा, जिला सक्ति को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने महिला को फोन कर बुलाया और रास्ता बंद होने का बहाना बनाकर उसे खरसिया रेलवे स्टेशन ले गया। वहां से वह उसे उसकी एक्टिवा से पालगढ़ घाटी की ओर ले गया।
जंगल में वारदात को दिया अंजाम
आरोपी ने सुनसान जगह पर महिला के हाथ स्कार्फ से बांधकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद ब्लेड से उसके हाथ और गले की नस काटकर हत्या कर दी। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से शव बरामद कर पोस्टमार्टम कराया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी
इस मामले में जांजगीर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। सजा की पुष्टि के लिए राज्य सरकार ने मामला हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया, वहीं आरोपी ने भी फैसले के खिलाफ अपील की थी।
हाई कोर्ट ने बदली सजा
हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड को बरकरार नहीं रखा जा सकता। अदालत ने सजा को बदलते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी, जो उसके जीवनभर लागू रहेगी। (Change in sentence in rape-murder case)


