Chaporah Procurement Case उस समय सामने आया जब बिलासपुर जिले की टीम अचानक चपोरा धान खरीदी केंद्र पहुंची। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने देखा कि एक किसान के वाहन में लगभग 100 शासकीय बारदाना भरे हुए थे और उन्हें केंद्र से बाहर ले जाया जा रहा था। यह दृश्य देखते ही टीम ने वहीं से जांच शुरू कर दी।
किसान ने बताया—केंद्र के चौकीदार ने ही दिया था बारदाना
पूछताछ में ग्राम सेमरा के किसान हनुमान प्रसाद ने बताया कि वह 8 दिसंबर से पहले धान भरने के लिए बोरे मांगने आया था और “baradana handling “ के तहत केंद्र के चौकीदार संजय यादव ने उन्हें यह बारदाना दे दिया था। किसान के बयान की पुष्टि फड़ में मौजूद अन्य कर्मियों ने भी की। इससे स्पष्ट हो गया कि बारदाना केंद्र स्तर पर ही बाहर किया जा रहा था।
Chaporah Procurement Case: गंभीर अनियमितता मानते हुए तीनों जिम्मेदार निलंबित
अधिकारियों ने इसे धान खरीदी व्यवस्था में सीधी लापरवाही माना। इसलिए खरीदी फड़ प्रभारी, बारदाना प्रभारी और चौकीदार—तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने यह भी कहा कि “Chaporah Procurement Case” जैसी घटनाएं पूरी प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती हैं और ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस बरता जाएगा।
प्रशासन का सख्त संदेश—लापरवाही स्वीकार नहीं
जिला प्रशासन ने साफ किया कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षणों की रफ्तार बढ़ाई जा रही है ताकि “procurement irregularities” जैसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई हो सके।



