सीजी भास्कर, 16 नवंबर। पूरे छत्तीसगढ़ में चालू सीजन के लिए समर्थन मूल्य की धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो रही है। तैयारी पूरी है, लेकिन दूसरी ओर कस्टम मिलिंग रैक पॉलिसी (Chhattisgarh Custom Milling Crisis) में बुरी तरह अटक गई है।
मिलर्स चावल जमा करना चाहते हैं, मगर एफसीआई में जगह न होने और रेलवे रैक न लगने से जमा प्रक्रिया लगभग ठप है।
केंद्र और राज्य सरकार की मांग के अनुसार 84 लाख मीट्रिक टन चावल जमा होना था, लेकिन 14 नवंबर 2025 तक सिर्फ 60 लाख मीट्रिक टन ही जमा हो पाया है।
यानी 24 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा चावल अभी भी बाकी है, जबकि जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून 2025 बीत चुकी है। कस्टम मिलिंग पूरे प्रदेश में लक्ष्य से काफी पीछे है और यह विभाग (Chhattisgarh Custom Milling Crisis) के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
प्रदेशभर में कस्टम मिलिंग की स्थिति चिंताजनक
समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद छत्तीसगढ़ से हर साल करीब 85 लाख मीट्रिक टन चावल उठाव के लिए जाता है।
लेकिन इस बार लक्ष्य से करीब 25% कम चावल जमा हुआ है।
अब तक सभी 33 जिलों से 60,14,133 मीट्रिक टन चावल जमा हुआ है, जबकि लक्ष्य 85 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा है।
धमतरी में दो लाख 22,882 मीट्रिक टन चावल जमा करना अभी बाकी
डीएमओ सुनील सिंह राजपूत ने बताया:
एफसीआई में जमा चावल उठाने रेलवे रैक उपलब्ध नहीं करा रहा।
मिलर चावल देने तैयार हैं, पर उठाव न होने के कारण स्टॉक अटका पड़ा है।
धमतरी जिले में 6,47,938 मीट्रिक टन लक्ष्य में से 4,30,822 मीट्रिक टन जमा हो चुका है।
अभी 2,22,882 मीट्रिक टन चावल जमा होना बाकी है।
धमतरी जिले के लिए प्रतिदिन 1.5 रैक और महीने में 35–40 रैक लगना चाहिए, जबकि वास्तविकता इससे बहुत कम है।
यही वजह है कि जिले में कस्टम मिलिंग बुरी तरह प्रभावित है।
रायपुर और धमतरी जिले सबसे आगे
धमतरी खाद्य विभाग के अनुसार प्रदेश में सबसे ज्यादा चावल जमा इन जिलों में हुआ:
रायपुर – 6,89,003 मीट्रिक टन
धमतरी – 4,32,472 मीट्रिक टन
दुर्ग – 4,08,695 मीट्रिक टन
बाकी 30 जिलों में जमा मात्रा काफी कम है।


