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Home » Chhattisgarh MBBS PG Reservation: हाईकोर्ट का संशोधित फैसला, राज्य के मेडिकल छात्रों को मिली बड़ी राहत

Chhattisgarh MBBS PG Reservation: हाईकोर्ट का संशोधित फैसला, राज्य के मेडिकल छात्रों को मिली बड़ी राहत

By Newsdesk Admin
20/01/2026
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सीजी भास्कर, 20 जनवरी | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पीजी प्रवेश से जुड़े एक अहम विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए राज्य के एमबीबीएस छात्रों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ किया है कि Chhattisgarh MBBS PG Reservation के तहत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटे में 50 प्रतिशत सीटें देना संविधान के दायरे में पूरी तरह वैध है।

Contents
  • पुराने आदेश में संशोधन, संस्थागत कोटा को मिली कानूनी मान्यता
  • किस बेंच ने दिया फैसला, जानिए पूरी जानकारी
  • याचिका की पृष्ठभूमि, कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
  • सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, हाईकोर्ट को क्यों लौटा मामला
  • राज्य सरकार की दलील, डोमिसाइल नहीं संस्थान है आधार
  • हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, निवास बनाम संस्थागत प्राथमिकता
  • क्या बदलेगा अब, मेडिकल पीजी एडमिशन का नया समीकरण
  • छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

पुराने आदेश में संशोधन, संस्थागत कोटा को मिली कानूनी मान्यता

डिवीजन बेंच ने अपने पहले के आदेश में उस हिस्से को हटाया है, जिसमें सरकार को उम्मीदवारों के बीच श्रेणी आधारित अंतर न करने का निर्देश दिया गया था। इस संशोधन के साथ ही अब यह साफ हो गया है कि मेडिकल पीजी में Institutional Quota देना गैर-कानूनी नहीं, बल्कि सीमित दायरे में स्वीकार्य है।

किस बेंच ने दिया फैसला, जानिए पूरी जानकारी

यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने माना कि मेडिकल पीजी जैसे विशेष पाठ्यक्रमों में Merit Based Institutional Preference देना सुप्रीम कोर्ट की व्याख्याओं के अनुरूप है।

याचिका की पृष्ठभूमि, कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने मेडिकल पीजी प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती दी। इन नियमों में छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी गई थी, जिसे पहले असंवैधानिक करार दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, हाईकोर्ट को क्यों लौटा मामला

हाईकोर्ट के पहले आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य को छूट दी कि वह हाईकोर्ट से यह स्पष्टता मांगे कि Institutional Reservation कितनी सीमा तक लागू किया जा सकता है। इसी निर्देश के आधार पर मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा।

राज्य सरकार की दलील, डोमिसाइल नहीं संस्थान है आधार

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि अब मेडिकल पीजी में निवास आधारित आरक्षण पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान व्यवस्था केवल उस संस्थान पर आधारित है, जहाँ से छात्र ने एमबीबीएस किया है। सरकार ने यह भी बताया कि 50 प्रतिशत छात्र ऑल इंडिया कोटे से आते हैं, जिससे किसी प्रकार का क्षेत्रीय भेदभाव नहीं होता।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, निवास बनाम संस्थागत प्राथमिकता

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दो टूक कहा कि पीजी मेडिकल सीटों पर निवास आधारित आरक्षण स्वीकार्य नहीं है, लेकिन सीमित स्तर पर Institution Based Preference देना संविधान सम्मत है। इसी आधार पर अदालत ने अपने पुराने आदेश की विवादित पंक्ति को हटा दिया।

क्या बदलेगा अब, मेडिकल पीजी एडमिशन का नया समीकरण

इस फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ में मेडिकल पीजी की 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत कोटे के तहत और 50 प्रतिशत ओपन मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी। इससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रवेश प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी।

छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

यह निर्णय न केवल हजारों एमबीबीएस छात्रों के भविष्य को दिशा देगा, बल्कि राज्य में मेडिकल शिक्षा नीति को भी स्थिरता प्रदान करेगा। Chhattisgarh MBBS PG Reservation से जुड़ा यह आदेश आने वाले वर्षों में प्रवेश प्रक्रिया का मजबूत आधार बनेगा।

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