सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की खेती-किसानी (Chhattisgarh Nano Fertilizer Shift) में इस वक्त बदलाव की एक नई और कड़क लहर दौड़ रही है। पारंपरिक खेती में लगातार बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही अमानवीय चुनौतियों के बीच अब ‘नैनो यूरिया’ और ‘नैनो डीएपी’ किसानों के लिए सबसे बड़ा और लोकप्रिय हथियार बनकर उभरे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कड़े शब्दों में मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इन आधुनिक विकल्पों को अपनाते हैं, तो यह न सिर्फ खेती की लागत को मटियामेट कर देगा, बल्कि उत्पादन को जबरदस्त बूस्ट देकर मिट्टी की सेहत को भी पूरी तरह महफूज़ रखेगा।
दरअसल, आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और मुनाफे का सौदा बनाने के लिए खादों के पारंपरिक और घिसे-पिटे ढर्रे में बदलाव करना बेहद जरूरी हो चुका है। यही वजह है कि अब धान के कटोरे छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Nano Fertilizer Shift) सहित देश के तमाम बड़े धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों में नैनो उर्वरकों को लेकर कड़ा क्रेज देखा जा रहा है। आमतौर पर यहां प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी पारंपरिक यूरिया और 1 बोरी डीएपी कड़ाई से ठूंस दी जाती है, लेकिन अब इस ढर्रे को बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
बोरी बनाम बोतल का कड़ा गणित: खाद के खर्च में सीधे तगड़ी बचत
मौजूदा बाजार भाव के अनुसार, एक बोरी पारंपरिक यूरिया की कीमत करीब 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये बैठती है। इस हिसाब से किसान केवल इन दोनों खादों पर ही प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक फूंक देते हैं। लेकिन नैनो तकनीक ने इस पूरे कूटनीतिक गणित को बदलकर रख दिया है:
500 मिलीलीटर की ताकत : कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो यूरिया की मात्र एक 500 मिलीलीटर की बोतल का असर पारंपरिक यूरिया की एक पूरी बोरी के बराबर होता है। फसल के दो चरणों में इसका छिड़काव कर भारी-भरकम बोरियों की जरूरत को खत्म किया जा सकता है।
यूरिया में सीधी बचत : अगर किसान 2 बोरी ठोस यूरिया (कीमत ~540 रुपये) की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया (कीमत ~450-500 रुपये) का इस्तेमाल करते हैं, तो सीधे प्रति एकड़ 100 रुपये की कड़क बचत होती है। इसके साथ ही परिवहन, भारी-भरकम भंडारण और मजदूरी का खर्च भी पूरी तरह बच जाता है।
डीएपी का आधा खर्च साफ : इसी तरह 50 किलो डीएपी की पूरी बोरी खेतों में झोंकने के बजाय यदि किसान केवल 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का कस्टमाइज्ड कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करें, तो प्रति एकड़ 75 से 150 रुपये तक की अतिरिक्त बचत तय है।
उत्पादन में 5 से 8 प्रतिशत की कड़क बढ़ोतरी
कृषि वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के पीछे का एक बड़ा और चौंकाने वाला सस्पेंस खोला है। पारंपरिक यूरिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और हवा में मिलकर पूरी तरह बर्बाद और नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत, नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों की पत्तियों द्वारा तेजी से अवशोषित कर लिए जाते हैं। इससे पौधों को सीधे और संतुलित पोषण मिलता है।
इसके कड़े और सकारात्मक परिणाम भी खेतों में साफ दिखने लगे हैं। इससे फसल की बढ़वार कड़क होती है, पौधों की हरियाली लंबे समय तक टिकी रहती है और दानों का भराव बेहद मजबूत होता है। कई कृषि परीक्षणों में तो इससे उत्पादन की गुणवत्ता सुधरने के साथ-साथ 5 से 8 प्रतिशत तक की बंपर पैदावार दर्ज की गई है। इसके अलावा, लगातार रासायनिक खाद डालने से बंजर हो रही मिट्टी की प्राकृतिक जैविक सक्रियता और भूजल को प्रदूषण से बचाने में भी यह तकनीक शत-प्रतिशत खरी उतरी है।




